Popup Image
Advertisement

कौन हैं अनिल मेनन? 8 महीने ISS में रहेंगे भारतीय मूल के NASA एस्ट्रोनॉट

कौन हैं अनिल मेनन? 8 महीने अंतरिक्ष में रहेंगे भारतीय मूल के NASA एस्ट्रोनॉट, भारत से है खास रिश्ता

भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए रवाना होने वाले हैं। वह करीब 8 महीने तक अंतरिक्ष में रहेंगे और वैज्ञानिक अनुसंधान व विभिन्न मिशनों में हिस्सा लेंगे। अनिल मेनन NASA के अंतरिक्ष यात्री होने के साथ-साथ अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल और SpaceX के पहले फ्लाइट सर्जन भी रह चुके हैं।

Advertisement

कौन हैं अनिल मेनन?

अनिल मेनन का जन्म 15 अक्टूबर 1976 को अमेरिका के मिनियापोलिस, मिनेसोटा में हुआ था। उनके पिता भारतीय मूल (मलयाली) के थे, जबकि उनकी मां यूक्रेनी मूल की थीं। भारतीय जड़ों से जुड़े होने के कारण उनका भारत से विशेष लगाव रहा है।

अनिल मेनन की शिक्षा

अनिल मेनन ने अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

Advertisement
  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक
  • स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स
  • स्टैनफोर्ड मेडिकल स्कूल से मेडिसिन की डिग्री
  • एयरोस्पेस मेडिसिन, इमरजेंसी मेडिसिन और वाइल्डरनेस मेडिसिन में विशेष प्रशिक्षण

डॉक्टर से अंतरिक्ष यात्री तक का सफर

अनिल मेनन एक अनुभवी इमरजेंसी फिजिशियन हैं। उन्होंने 2010 के हैती भूकंप और 2015 के नेपाल भूकंप के दौरान राहत कार्यों में हिस्सा लिया और फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में सेवाएं दीं।

उन्होंने हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ काम करते हुए माउंट एवरेस्ट क्षेत्र में पर्वतारोहियों को चिकित्सा सहायता भी प्रदान की।

Advertisement

NASA और SpaceX में अहम भूमिका

मेनन ने 2014 में NASA में फ्लाइट सर्जन के रूप में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तैनात अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम किया और अंतरिक्ष चिकित्सा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया।

2018 में वह SpaceX से जुड़े और कंपनी के पहले फ्लाइट सर्जन बने। उन्होंने NASA-SpaceX Demo-2 मिशन की तैयारी में अहम भूमिका निभाई, जिसके जरिए पहली बार निजी कंपनी द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों को ISS भेजा गया था।

कब बने NASA एस्ट्रोनॉट?

NASA ने दिसंबर 2021 में अनिल मेनन को एस्ट्रोनॉट उम्मीदवार के रूप में चुना था। इसके बाद उन्होंने लगभग दो वर्षों का कठोर प्रशिक्षण पूरा किया और 2024 में आधिकारिक रूप से NASA Astronaut Corps का हिस्सा बने।

भारत से क्या है खास जुड़ाव?

अनिल मेनन के पिता भारतीय मूल के थे और उनका भारत से गहरा भावनात्मक संबंध रहा है। वह कई बार भारत आ चुके हैं और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े मेडिकल मिशनों में भी काम कर चुके हैं। यही वजह है कि भारतीय मूल के इस वैज्ञानिक की उपलब्धियां भारत में भी गर्व का विषय मानी जाती हैं।

ISS मिशन में कौन होंगे उनके साथी?

इस मिशन में अनिल मेनन, रूसी कॉस्मोनॉट प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ रोस्कोस्मोस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा करेंगे।

उनकी पत्नी भी हैं अंतरिक्ष यात्री

अनिल मेनन की पत्नी अन्ना विल्हेम भी अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने सितंबर 2024 में SpaceX के निजी मानव अंतरिक्ष मिशन Polaris Dawn के तहत अंतरिक्ष यात्रा की थी। यह मिशन लगभग पांच दिनों तक चला था।

क्यों खास है यह मिशन?

ISS में करीब 8 महीने का यह मिशन वैज्ञानिक अनुसंधान, मानव स्वास्थ्य पर अंतरिक्ष के प्रभाव और भविष्य के चंद्रमा व मंगल मिशनों की तैयारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनिल मेनन का अनुभव और मेडिकल विशेषज्ञता इस मिशन में अहम भूमिका निभा सकती है।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें