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भारतवंशी कारोबारी ने इंडोनेशिया राष्ट्रपति को ठगा, फाइटर जेट सौदे का झांसा

अमेरिका में पहले से ही धोखाधड़ी के गंभीर कानूनी मुकदमों का सामना कर रहे भारतवंशी उद्योगपति गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी एक बेहद सनसनीखेज और बड़े फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप लगा है। ‘ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट’ (OCCRP) और इंडोनेशिया की प्रतिष्ठित खोजी मैगजीन ‘टेम्पो’ द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई एक विस्तृत रिपोर्ट में इस अंतरराष्ट्रीय जालसाजी का भंडाफोड़ किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, गौरव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) का सीक्रेट एजेंट बताकर इंडोनेशिया के वर्तमान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (जो उस समय देश के रक्षा मंत्री थे) का विश्वास जीता और सैन्य सौदों के बहाने करीब 425 करोड़ रुपये का फर्जी कर्ज स्वीकृत करा लिया।

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इस शातिर ठग ने जकार्ता में अपनी गहरी पैठ बनाने के लिए कई अत्याधुनिक और बड़े हथियारों की आपूर्ति करने के झूठे वादे किए थे। बहरहाल, गौरव श्रीवास्तव का फर्जीवाड़ा केवल कागजी दावों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में अपनी फर्जी साख का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को भी गुमराह करने का प्रयास किया। जांच रिपोर्टों के सामने आने के बाद अब लॉस एंजिलिस से लेकर जकार्ता तक हड़कंप मच गया है और उसकी फर्जी शेल कंपनियों के नेटवर्क की परतें लगातार खुल रही हैं।

शेल कंपनियों के जरिए अरबों रुपये के रक्षा सौदों का जाल:

खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, गौरव ने इंडोनेशियाई सेना को 36 घातक F-15 लड़ाकू विमान, आधुनिक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक अत्याधुनिक मिलिट्री कमांड कंट्रोल सिस्टम दिलाने का बहुत बड़ा दावा किया था। सरकारी स्तर पर की गई गहन जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि जिन चार मुख्य कंपनियों के माध्यम से उसने पांच बड़े रक्षा सौदे हथियाए थे, वे सभी केवल कागजों पर चलने वाली फर्जी यानी शेल कंपनियां (Shell Companies) थीं। बाद में टैक्स चोरी और गैर-कानूनी गतिविधियों के कारण इन सभी कंपनियों को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिर्फ 36 F-15 लड़ाकू विमानों की यह संभावित डील ही करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये की आंकी गई थी।

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फर्जीवाड़े की रकम से लॉस एंजिलिस में खरीदा आलीशान बंगला:

यह पूरा अंतरराष्ट्रीय घोटाला मुख्य रूप से साल 2020 से 2022 के बीच अंजाम दिया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इंडोनेशिया से रक्षा सौदों के नाम पर उठाई गई इस भारी-भरकम रकम का एक बड़ा हिस्सा गौरव ने अमेरिका में डाइवर्ट कर दिया। इसी पैसे का इस्तेमाल करके उसने कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस में लगभग 208 करोड़ रुपये की कीमत का एक बेहद आलीशान और महंगा विला खरीदा। बहरहाल, उसकी यह विलासिता ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सकी और अमेरिकी प्रशासन ने साल 2024 से ही उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और जालसाजी के कई आपराधिक मुकदमे दर्ज कर रखे हैं।

‘मिस्टर G’ की प्रबोवो से नजदीकी और जासूसी की झूठी कहानियां:

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गौरव ने तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रबोवो सुबियांतो का इस कदर अंधविश्वास जीत लिया था कि वे उसे बेहद आत्मीयता से ‘मिस्टर G’ कहकर पुकारते थे। प्रबोवो के करीब आने के लिए उसने उनके निजी जीवन से जुड़ी ऐसी गुप्त जानकारियों का चालाकी से फायदा उठाया, जो केवल उनके पारिवारिक सदस्यों को मालूम थीं। मिसाल के तौर पर, उसे पता था कि प्रबोवो अपने आवास में लगे मकड़ी के जालों को प्रकृति का एक हिस्सा मानते हैं और उन्हें कभी साफ नहीं करने देते। इसके अतिरिक्त, गौरव ने राष्ट्रपति के सामने यह मनगढ़ंत दावा भी किया था कि उसने साल 2002 के भीषण बाली बम विस्फोटों के मास्टरमाइंड आतंकियों को पकड़वाने में मुख्य भूमिका निभाई थी और प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में वाशिंगटन में अपनी कथित राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल किया था।

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हालांकि, इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रिको सिराइत ने स्पष्ट किया है कि जिन रक्षा सौदों को लेकर बातचीत चल रही थी, वे कभी भी अंतिम आधिकारिक समझौते (एमओयू) तक नहीं पहुंच सके थे। नतीजतन, इंडोनेशियाई सरकार को इस जालसाजी से कोई सीधा वित्तीय या आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा।

अमेरिकी दिग्गजों के साथ तस्वीरें दिखाकर बनाता था प्रभाव:

अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स और अदालती दस्तावेजों के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव खुद को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवन और सीनेटर चक शूमर समेत कई शीर्ष अमेरिकी जनरलों का अत्यंत करीबी मित्र बताता था। वह दुनिया भर के कारोबारियों और विदेशी राजनयिकों को इन वैश्विक नेताओं के साथ अपनी मूल तस्वीरें दिखाकर यह भरोसा दिलाता था कि अमेरिकी सत्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोच्च शिखर पर उसका सीधा नियंत्रण है। हालांकि, बाद में हुई जांच से यह साबित हुआ कि इन शीर्ष नेताओं तक उसकी पहुंच किसी आधिकारिक पद के कारण नहीं थी, बल्कि उसने भारी-भरकम राजनीतिक चंदा (डोनेशन) देकर और महंगे सार्वजनिक आयोजनों के टिकट खरीदकर ये तस्वीरें खिंचवाई थीं, जिनका उपयोग वह गौरव श्रीवास्तव का फर्जीवाड़ा चमकाने के लिए करता था।

जेम्स बॉन्ड जैसी कहानियां और नकली सर्जरी के निशान:

कैलिफोर्निया की अदालत में दाखिल मुकदमे के मुताबिक, गौरव श्रीवास्तव खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का ‘नॉन-ऑफिशियल कवर’ (NOC) यानी एक गुप्त जासूस बताता था। लोगों को प्रभावित करने के लिए वह हॉलीवुड फिल्मों जैसी जासूसी की कहानियां सुनाया करता था। उसने कई लोगों से दावा किया था कि उसने सीआईए के सबसे गोपनीय ट्रेनिंग सेंटर ‘द फार्म’ में कड़ा सैन्य प्रशिक्षण लिया है। वह अपने शरीर पर बने पुराने निशानों को दिखाते हुए कहता था कि ये गुप्त ऑपरेशन्स के दौरान लगी गोलियों और चोटों के जख्म हैं। उसने यह मनगढ़ंत कहानी भी गढ़ी थी कि साल 2008 में अफ्रीका के कांगो में एक मिशन के दौरान खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) ने उसे बंधक बना लिया था, जहां से वह अपनी जान बचाकर भागा था।

अदालती जांच और मेडिकल रिपोर्ट्स ने अंततः उसके इन सभी दावों की हवा निकाल दी। फॉरेंसिक जांच में यह सच सामने आया कि उसके शरीर पर मौजूद वे गहरे निशान किसी सैन्य मिशन या गोलीबारी के नहीं थे, बल्कि बचपन में उसकी हुई एक सामान्य किडनी की सर्जरी के टांके थे। इस खुलासे के बाद उसकी कथित बहादुरी के सभी दावों की पोल पूरी तरह खुल चुकी है।

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