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ऑस्ट्रेलिया से भारत लौट रहीं बेशकीमती प्राचीन मूर्तियां: क्या है महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों को नई मजबूती मिली है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने भारत की तीन प्राचीन और ऐतिहासिक कलाकृतियों को स्वेच्छा से वापस लौटाने की घोषणा की है। इनमें देवी भद्रकाली की आकृति वाला धातु का त्रिशूल, भगवान शिव के वाहन नंदी की पत्थर की प्रतिमा और छह मुख वाले भगवान कार्तिकेय की प्राचीन मूर्ति शामिल हैं। ये सभी कलाकृतियां अब तक ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख संग्रहालयों और कला दीर्घाओं के संग्रह का हिस्सा थीं।

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प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते विश्वास और मित्रता के प्रतीक के रूप में इन सांस्कृतिक धरोहरों को भारत को सौंपा जाएगा। उन्होंने बताया कि ये कलाकृतियां पहले नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया और आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में सुरक्षित रखी गई थीं।


कौन-कौन सी प्राचीन धरोहरें लौटाई जाएंगी?

भारत को लौटाई जा रही पहली धरोहर देवी भद्रकाली की आकृति से सुसज्जित एक धातु का औपचारिक त्रिशूल है। यह तमिलनाडु के कोल्लुमंगुडी स्थित श्री काशीविश्वनाथस्वामी मंदिर से जुड़ा माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह 13वीं से 16वीं शताब्दी के बीच का है और शैव-शक्ति परंपरा में दैवीय शक्ति, सुरक्षा और बुराई के विनाश का प्रतीक माना जाता है।

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दूसरी धरोहर भगवान शिव के वाहन नंदी की पत्थर की प्रतिमा है। यह भी उसी मंदिर से संबंधित बताई जाती है और लगभग 13वीं से 16वीं शताब्दी की मानी जाती है। भारतीय मंदिर स्थापत्य में नंदी की प्रतिमा श्रद्धा, शक्ति और धर्म के प्रतीक के रूप में गर्भगृह की ओर स्थापित की जाती है।

तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण धरोहर भगवान कार्तिकेय (मुरुगन/षणमुख) की छह मुख वाली पत्थर की प्रतिमा है। यह चोलकालीन मूर्ति तमिलनाडु के तंजावुर जिले के मनमबाड़ी स्थित नागनाथस्वामी मंदिर से संबंधित है। माना जाता है कि इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान हुआ था। यह प्रतिमा ज्ञान, वीरता और दैवीय संरक्षण का प्रतीक मानी जाती है।

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ऑस्ट्रेलिया को भी लौटाएगा भारत एक ऐतिहासिक धरोहर

सांस्कृतिक आदान-प्रदान के तहत भारत भी ऑस्ट्रेलिया को उसके मूल निवासी समुदाय फर्स्ट नेशंस के एक व्यक्ति के पार्थिव अवशेष लौटाएगा। यह अवशेष फिलहाल चेन्नई के सरकारी संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे ऐतिहासिक न्याय, आपसी विश्वास और मेल-मिलाप की भावना को मजबूती मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है।


पीएम मोदी के दौरे को मिली नई सांस्कृतिक पहचान

ऑस्ट्रेलिया की तीन दिवसीय यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारतीय समुदाय ने पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भव्य स्वागत के साथ अभिनंदन किया। इसी दौरे के दौरान प्राचीन कलाकृतियों की वापसी की घोषणा को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलने के साथ-साथ विश्वभर में अवैध रूप से पहुंची ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी के प्रयासों को भी नई गति मिलेगी। दोनों देशों ने भविष्य में भी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

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