राजपाल यादव को कोर्ट की कड़ी फटकार: जेल या पैसे भरें

दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव को राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें 3 महीने की जेल की सजा बरकरार रखी है। यह मामला ‘मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ हुए आर्थिक विवाद और चेक बाउंस होने से जुड़ा है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने कड़े फैसले में स्पष्ट किया कि कोर्ट के सामने बार-बार किए गए वादों को पूरा करने में विफल रहने वाले याचिकाकर्ताओं की 21 याचिकाओं को खारिज किया जाता है।
अदालती कार्यवाही और वादों का सिलसिला
फैसले में दर्ज विवरण के अनुसार, राजपाल यादव ने पिछले कई वर्षों में शिकायतकर्ता का पैसा लौटाने के लिए कोर्ट से बार-बार अतिरिक्त समय मांगा था। कोर्ट ने उनके वकीलों और स्वयं उनके द्वारा दिए गए आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए कई बार सजा पर रोक लगाई और सुनवाई स्थगित की। हालांकि, भुगतान के कुछ प्रयासों के बावजूद, दोनों पक्ष किसी ठोस अंतिम समझौते पर पहुंचने में असमर्थ रहे।
‘जेल जाने का विकल्प’ और कोर्ट की फटकार
मामले में स्थिति तब गंभीर हो गई जब अभिनेता ने कोर्ट को सूचित किया कि वे शिकायतकर्ता को कोई भी धनराशि देने के बजाय जेल जाना अधिक पसंद करेंगे। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए जस्टिस शर्मा ने कहा कि:
- कानून कोई ऐसी स्क्रिप्ट नहीं है जिसे किसी एक्टर की मर्जी से दोबारा लिखा जा सके।
- न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना हर पक्षकार की जिम्मेदारी है।
- यदि कोई पक्षकार पैसे चुकाने के बजाय जेल जाने का विकल्प चुनता है, तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद हो सकती है, लेकिन इससे कानूनी देनदारियां खत्म नहीं होतीं।
अपील और कानूनी स्थिति
| मुख्य बिंदु | कोर्ट का निर्णय |
|---|---|
| प्रोबेशन की अपील | ‘प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट’ के तहत राहत देने से इनकार। |
| निष्कर्ष | ट्रायल और सेशंस कोर्ट के फैसलों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं मिला। |
| अगला कदम | एक्टर को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश। |
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं का आचरण ऐसा नहीं था कि उन्हें कानून के तहत विशेष राहत दी जाए। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका केवल तय कानूनी सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेती है और रणनीति बदलने से कानूनी स्थिति नहीं बदलती।









