सर्दी-खांसी के मौसम में सावधानी जरूरी, उज्जैन में स्वाइन फ्लू के 16 मरीज

2 पॉजिटिव की मौत, कारण अन्य बीमारियां
उज्जैन। वायरल फीवर स्वाइन फ्लू नहीं होता। सांस लेने में तकलीफ होने पर ही इसकी जांच कराई जाती है। रिपोर्ट पॉजिटिव आए तो भी घबराने की जरूरत नहीं गाइड लाइन के पालन से मरीज स्वस्थ हो जाते हैं। जिले में अब तक 16 मरीज मिले जिनमें 14 स्वस्थ हो चुके हैं। बारिश सीजन में सर्दी, खांसी, बुखार का प्रकोप बढ़ जाता है। वर्तमान में चल रहा वायरल फीवर 4 से 6 दिनों तक मरीज को परेशान कर रहा है। जिनका इम्युनिटी सिस्टम कमजोर है वह लोग एस1एन1 वायरस की चपेट में आ सकते हैं। लेकिन डॉक्टर की सलाह, नियमित उपचार से मरीज स्वस्थ हो जाते हैं।
स्वाइनफ्लू की मॉनीटरिंग कर रहे डॉ. आदित्य माथुर बताते हैं कि जिले के किसी भी शासकीय अस्पताल में अब तक एक भी स्वाइन फ्लू का मरीज नहीं मिला है। एक मरीज खाचरौद से रैफर होकर आया वह अब स्वस्थ है। 16 मरीज प्राइवेट अस्पताल में चिन्हित हुए थे। दो वृद्ध महिला मरीज जो पॉजिटिव थीं उन्हें डायबिटीज, ब्लडप्रेशर सहित अन्य समस्याएं भी थीं। सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल ने बताया कि चरक अस्पताल की 4 थी मंजिल पर स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है।
सांस लेने में तकलीफ हो तो कराते हैं जांच
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार मरीजों की ए, बी, सी केटेगरी बनाई है। ए और बी के मरीज वायरल फीवर की केटेगरी में आते हैं जिन्हें सर्दी, खांसी, बुखार की समस्या होती है। सी केटेगरी के जिन्हें सांस लेने में अधिक तकलीफ हो, ओ2 लेवल 90 से कम हो उनकी डॉक्टर की सलाह पर स्वाइन फ्लू की जांच कराई जाती है।









