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अब तक 378 कृष्णमृगों का रेस्क्यू, कूनो अभयारण्य भेजा

किसानों की फसलों को बचाने लगातार दूसरे साल चल रहा अभियान

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शाजापुर। जिले के कालापीपल के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की फसलों को बचाने के लिए बोमा पद्धति से काले हिरणों को पकडऩे का अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 378 काले हिरणों को पकड़कर कूनो अभ्यारण भेजा जा चुका है। अब यहां से टीम ग्राम टीटवास पहुंचेगी जहां हिरणों से फसलों को बचाने इन्हें सुरक्षित करने का अभियान चलाया जाएगा।

शाजापुर और सीहोर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में फसलों को नुकसान से बचाने और वन्यजीवों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए कृष्णमृग रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। गुरुवार को कालापीपल के मनसाया गांव से 51 कृष्णमृगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। इसके साथ ही 10 से 15 अक्टूबर के बीच कुल 378 कृष्णमृगों को बचाया जा चुका है

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, जिन्हें कूनो अभयारण्य भेजा जा रहा है। रेस्क्यू किए गए कृष्णमृगों के आंकड़े बताते हैं कि 10 अक्टूबर को हन्नूखेड़ी से 97, 11 अक्टूबर को 79, 13 अक्टूबर को पंचदेहरिया से 77, 14 अक्टूबर को मनसाया से 74 और 15 अक्टूबर को मनसाया से ही 51 कृष्णमृग पकड़े गए। कालापीपल में काम पूरा होने के बाद अब इस अभियान का अगला चरण शुजालपुर विधानसभा क्षेत्र में शुरू होने जा रहा है। यहां टीटवास गांव और उसके आसपास बोमा बनाकर वन्यजीवों को रेस्क्यू करने की तैयारी की गई है।

दूसरे साल दो हजार हिरण पकडऩे का लक्ष्य
शुजालपुर और कालापीपल क्षेत्र में कृष्णमृगों की बड़ी संख्या के कारण किसानों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचता रहा है। फसलों को बचाने और मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व को समाप्त करने के लिए प्रदेश सरकार लगातार दूसरे साल यह विशेष अभियान चला रही है। अभियान के दूसरे चरण में 2 हजार कृष्णमृगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित राष्ट्रीय उद्यानों में भेजने का लक्ष्य रखा है। अभियान में दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम, वन्यप्राणी चिकित्सक, वरिष्ठ वन अधिकारी और प्रशिक्षित मैदानी अमला दिन-रात इस रेस्क्यू और परिवहन की प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से अंजाम देने में जुटा हुआ है।

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