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शाजापुर की सेहत सुधारने के लिए सीएम ने भेजा डॉक्टर कलेक्टर

  • जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार आने की उम्मीदों को पंख लगे
  • 33वें कलेक्टर के रूप में पदभार संभालेंगे, भगवान महाकाल से आशीर्वाद लेंगे
  • 10वीं में मेरिट में आने के बाद ही मीडिया से कहा था मुझे कलेक्टर बनना है
  • हरसूद में एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी गई, वहां लोगों के बीच लोकप्रिय रहे
  • सतना में जिला पंचायत के सीईओ रहे। किसानों की समस्याएं सुलझाईं

उज्जैन/शाजापुर। मप्र में प्रशासनिक फेरबदल के बाद 2017 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. परीक्षित संजयराव झाड़े को शाजापुर का नया कलेक्टर बनाया गया है। वे जिले के ३३वें कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। महाराष्ट्र के पुसद में बस कंडक्टर के बेटे ने पहले डॉक्टर की पढ़ाई पूरी की, फिर यूपीएससी पास कर आईएएस बने। इससे पहले वे इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के पद पर कार्यरत थे।

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महाराष्ट्र के छोटे से शहर पुसद से निकलकर डॉक्टर बनने और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। मां की इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने एमबीबीएस किया, लेकिन आगे करियर में क्या करना है, इसका फैसला खुद करने की बात कही थी।उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और अपने अंतिम प्रयास में परीक्षा पास कर आईएएस बने। इनसे पहले शाजापुर कलेक्टर रही ऋजु बाफना को उज्जैन संभाग में अपर आयुक्त राजस्व बनाया गया है।

पिता बस कंडक्टर और मां ने संभाली परिवार की जिम्मेदारी
डॉ. परीक्षित झाड़े के पिता महाराष्ट्र राज्य परिवहन सेवा में बस कंडक्टर थे। उनकी मां गृहिणी होने के साथ सिलाई और ट्यूशन भी पढ़ाती थीं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और उनका भविष्य संवारने पर पूरा ध्यान दिया। उनके बड़े भाई उनसे दो साल बड़े हैं और इंजीनियर हैं। डॉ. झाड़े ने पढ़ाई के शुरुआती दौर में हर कक्षा में टॉप नहीं किया, लेकिन 10वीं में मेरिट में जगह बनाने के बाद उन्होंने मीडिया में कलेक्टर बनने की बात कही थी। उस समय उन्हें यह भी ठीक से पता नहीं था कि आईएएस अधिकारी या कलेक्टर क्या काम करता है, लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य तय कर लिया था।

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एसडीएम से आईडीए सीईओ तक का सफर
डॉ. झाड़े 2017 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 29 नवंबर 1989 को हुआ। उन्होंने मध्यप्रदेश में खंडवा जिले के हरसूद में एसडीएम के रूप में प्रशासनिक सेवा की शुरुआत की। वहां लोकप्रिय रहे। इसके बाद वे जिला पंचायत सतना के सीईओ रहे। फरवरी 2024 में उन्हें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई। सितंबर 2025 में उन्होंने इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के सीईओ का पद संभाला। अब वह पहली बार कलेक्टर बने हैं।

नए कलेक्टर के लिए प्रमुख चुनौतियां

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शाजापुर जैसे कृषि-बहुल, अर्ध-शहरी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले की कमान संभालते ही परीक्षित संजय राव के सामने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक, विकासात्मक और स्थानीय चुनौतियां रहेंगी।

रबी सीजन (गेहूं, चना, लहसुन) की बुवाई के समय सोसायटियों और वितरण केंद्रों पर खाद की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना तथा वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सबसे तात्कालिक चुनौती होगी।

शाजापुर-शुजालपुर बेल्ट में सोयाबीन व प्याज के न्यूनतम समर्थन मूल्य और भावांतर/उपार्जन केंद्रों पर किसानों को टोकन व तुलाई में आने वाली दिक्कतों को दूर करना।

अतिवृष्टि या मौसमी अनिश्चितताओं से प्रभावित फसलों के सर्वे और राहत राशि का समय पर वितरण कराना।

डॉ. झाड़े स्वयं एमबीबीएस डॉक्टर हैं, इसलिए स्थानीय जनता और प्रशासन को उनसे स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार की उम्मीद रहेगी। जिला अस्पताल शाजापुर, शुजालपुर सिविल अस्पताल और ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैथोलॉजी सुविधाओं और दवाओं की निरंतर उपलब्धता बनाए रखना। ग्रामीण अंचलों में संस्थागत प्रसव को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करना और आंगनवाड़ी स्तर पर कुपोषण के मामलों को घटाने के अलावा प्रशासनिक तालमेल भी चुनौती रहेगी। चूंकि कलेक्टर को सीएम की पसंद माना जा रहा है इसलिए राजनीतिक रूप से कोई दिक्कत नहीं आएगी।

सीएम डॉ. मोहन यादव से मिलेंगे, उज्जैन आएंगे
अक्षर विश्व से चर्चा करते हुए शाजापुर के नए कलेक्टर डॉ झाड़े ने कहा कि वे भोपाल सीएम डॉ. मोहन यादव से मिलने जाएंगे। उसके बाद उज्जैन आकर बाबा महाकाल से आशीर्वाद लेंगे। डॉ. झाड़े ने कहा कि शाजापुर के लोगों को उनसे जो उम्मीदें हैं वह पूरी की जाएंगी। प्रशासनिक तालमेल के अलावा बेहतर प्रशासन देना उनकी प्राथमिकता रहेगा।

राहुल गांधी का कार्यक्रम होने वाला था इंदौर में तब चर्चा में आए डॉ. झाड़े
इंदौर में राहुल गांधी का कार्यक्रम होना था। कांग्रेसी तैयारी में लगे हुए थे। दिक्कत यह आ रही थी कि उन्हें आयोजन के लिए मैदान नहीं मिल रहा था। तब प्राधिकरण के सीईओ डॉ. झाड़े से उम्मीद की गई। उन्होंने प्राधिकरण की जमीन (रीजनल पार्क) पर आयोजन के लिए 14 लाख रुपए जमा करने की शर्त रखी। कांग्रेसी खेमें में हड़कंप मच गया। इसी मुद्दे से डॉ. झाड़े चर्चाओं में आए। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि कलेक्टर डॉ. झाड़े फ्री हैंड रहेंगे। उन्हें मुख्यमंत्री की पसंद वाला अधिकारी माना जा रहा है।

ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल ले बैठी थी कन्याल को
बता दें कि तत्कालीन शाजापुर कलेक्टर किशोर कन्याल को ट्रक ड्राइवर्स हड़ताल विवाद के बाद हटाए जाने पर राज्य शासन ने नरसिंहपुर कलेक्टर रहीं ऋजु बाफना को शाजापुर की कमान सौंपी थी। 2014 बैच की आईएएस बाफना ने 5 जनवरी 2024 को शाजापुर कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाला था।

कानून-व्यवस्था एवं सांप्रदायिक सौहाद्र्र
संवेदनशील क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखना, शाजापुर और मक्सी क्षेत्र सामाजिक व सांप्रदायिक दृष्टि से समय-समय पर संवेदनशील रहे हैं। त्योहारों और आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और असामाजिक तत्वों पर सख्त नियंत्रण रखना प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग और जिला मार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की पहचान व सुगम यातायात प्रबंधन भी उनके लिए चुनौतियां रहेंगी।

बात कुछ कलेक्टर्स की

सर्वाधिक लोकप्रिय रहे राजीव शर्मा
शाजापुर कलेक्टर रहे राजीव शर्मा को जिले के लोग आज तक नहीं भूले हैं। लोग बताते हैं कि उनके कार्यकाल में प्रशासनिक पकड़ गजब की थी। बिना किसी को सूचना दिए अस्पताल का निरीक्षण, यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करना। ऐसे कई किस्से उनसे जुड़े हैं। आज भी वे शाजापुर आते हैं तो उनके इर्दगिर्द चाहने वालों की भीड़ जमा हो जाती है। उनके कार्यकाल में पवन चक्की की स्थापना भी हुई थी। नि:शुल्क कोचिंग और ग्रामीण ओलम्पिक के लिए उन्हें याद किया जाता है।

कोरोना में सजग रहे दिनेश जैन
कलेक्टर दिनेश जैन ने कोरोना काल में शानदार काम किया। प्रशासनिक पकड़ के साथ उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को मुस्तैद रखा। लोग बताते हैं कि कई रात वे जागते रहे और जिले का दौरा करते रहे। उन्हें आज भी लोग याद करते हैं। सुबह होते ही वे दौरे पर निकल जाते और गली-मोहल्लों में पहुंच कर हालात का जायजा लेते थे। जैन संगीत और साहित्य पे्रमी भी थे। उनका ध्येय था कि कार्यालय में शिकायत लेकर आने वाले की फरियाद सुनी जाए और समस्या का समाधान किया जाए। मृदुभाषी जैन के पत्रकारों से भी मधुर संबंध रहे।

प्रशासनिक पकड़ मजबूत थी बाफना की
ऋजु बाफना के बारे में यह चर्चा-ए-आम है कि सरकारी बैठकों में अधिकारियों का न आना उन्हें नागगवार गुजरता था। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक व्यवस्था तो मजबूत थी ही साथ ही लापरवाह कर्मचारियों में भी खौफ था। आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही से हुई उनकी प्रशासनिक मुठभेड़ की चर्चा भोपाल तक रही। आलम यह रहा कि संभागायुक्त आशीष सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। बाफना को लापरवाही और बहानेबाजी पसंद नहीं थी। इसलिए उनकी अधिकारियों से खटपट होती रहती थी। नवाचार के क्षेत्र में भी उन्होंने बहुत काम किए। महिलाओं में बाफना लोकप्रिय रहीं।

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