विश्व निश्चेतना दिवस आज: एनेस्थीसिया बेहोश करना नहीं, मरीज की देखभाल का अहम हिस्सा

ऑपरेशन की बात आते ही मरीज और परिजनों के मन में कई सवाल उठते हैं- क्या दर्द होगा? बेहोशी कैसे दी जाएगी? होश कब आएगा? इन सवालों के बीच एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ की भूमिका अक्सर कम समझी जाती है। एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, यानी निश्चेतना विशेषज्ञ। उनकी जिम्मेदारी दवा देकर बेहोश करने से कहीं ज्यादा व्यापक है।
16 अक्टूबर को विश्व निश्चेतना दिवस मनाया जाता है। 2026 के लिए विश्व एनेस्थीसियोलॉजिस्ट महासंघ की थीम है “Before, During and Beyond Surgery” अर्थात ‘ऑपरेशन से पहले, दौरान और उसके बाद भी।’ यह विषय मरीज की पूरी उपचार यात्रा में निश्चेतना विशेषज्ञ के योगदान को सामने लाता है। एनेस्थीसिया को हिंदी में निश्चेतना या संज्ञाहरण कहा जाता है। इसका अर्थ है- प्रक्रिया की जरूरत के अनुसार शरीर का कोई हिस्सा सुन्न करना, नियंत्रित रूप से बेहोश करना और दर्द की अनुभूति रोकना या कम करना। हर प्रक्रिया में मरीज को पूरी तरह बेहोश करना जरूरी नहीं होता। कुछ ऑपरेशन स्पाइनल, एपिड्यूरल या नर्व ब्लॉक से शरीर का संबंधित हिस्सा सुन्न करके किए जा सकते हैं।
एनेस्थीसियोलॉजिस्ट मरीज की बीमारियों, दवाओं, एलर्जी और पहले हुए ऑपरेशन या एनेस्थीसिया के अनुभव की जानकारी लेते हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय या फेफड़ों की बीमारी जैसी स्थितियों को ध्यान में रखकर तैयारी की जाती है। मरीज को विकल्प, संबंधित जोखिम और आवश्यक निर्देश समझाना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इनमें आयुर्वेदिक या हर्बल उत्पाद, खून पतला करने वाली दवाएँ तथा मधुमेह और वजन घटाने की दवाएँ भी शामिल हैं। कोई दवा स्वयं बंद न करें। खाने-पीने और दवा लेने के निर्देश अपनी उपचार टीम से लें; सभी मरीजों के लिए एक जैसे निर्देश उपयुक्त नहीं होते।
ऑपरेशन के दौरान देखभाल
ऑपरेशन के दौरान निश्चेतना विशेषज्ञ साँस, ऑक्सीजन, हृदयगति, रक्तचाप और अन्य जरूरी शारीरिक कार्यों की निगरानी करते हैं। आवश्यकता के अनुसार दवाएँ, तरल और सांस की सहायता दी जाती है। शरीर की स्थिति में बदलाव होने पर उसे पहचानना और उपचार करना उनकी जिम्मेदारी है। अस्पताल के लिए व्यवस्थित एनेस्थीसिया सेवा नियोजित और आपातकालीन ऑपरेशन, रिकवरी तथा अन्य प्रक्रियाओं के संचालन में अहम है। इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टर के साथ प्रशिक्षित नर्स, तकनीशियन, उचित उपकरण और टीम के बीच स्पष्ट संवाद भी जरूरी हैं।
ऑपरेशन थिएटर के बाहर भी महत्वपूर्ण भूमिका
एनेस्थीसियोलॉजिस्ट का कार्य ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं है। जरूरत पडऩे पर एमआरआई, एंडोस्कोपी, ब्रोंकोस्कोपी और अन्य प्रक्रियाओं में संज्ञाहरण या सेडेशन दिया जा सकता है। आपातकालीन देखभाल, पुनर्जीवन, सांस का रास्ता सुरक्षित रखने, गहन चिकित्सा और दर्द प्रबंधन में भी इस विशेषज्ञता का योगदान होता है। छोटी प्रक्रिया या ओटी के बाहर होने वाली जाँच में भी सुरक्षा की जरूरत कम नहीं होती। उचित मूल्यांकन, सहमति, निगरानी, ऑक्सीजन, आपातकालीन उपकरण और रिकवरी की देखरेख आवश्यक हैं।
दर्द बताना उपचार का हिस्सा
ऑपरेशन के बाद दर्द, मतली या अन्य परेशानी हो तो मरीज उसे छिपाएं नहीं। समय पर जानकारी देने से टीम उपचार कर सकती है। पुराने दर्द की देखभाल में भी कारण का आकलन, दवाएं, व्यायाम या पुनर्वास और उपयुक्त मरीजों में प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। विश्व निश्चेतना दिवस का संदेश मरीजों और परिवारों के लिए स्पष्ट है : अपने
निश्चेतना विशेषज्ञ को जानें, पूरी स्वास्थ्य जानकारी दें और सवाल पूछें। आधुनिक चिकित्सा में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट का योगदान मरीज की तैयारी, प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा, दर्द से राहत और आगे की देखभाल को एक सूत्र में जोड़ता है : ऑपरेशन से पहले, दौरान और उससे आगे भी।
डॉ. तान्या जैन
MBBS, MD Anaesthesia
अवन्ति सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल









