मंदिर में एक ही भगवान की दो मूर्तियां रख सकते हैं या नहीं ? जानें जरूरी नियम

घर के मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें रखने को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं रहती हैं। सबसे सामान्य सवाल यह होता है कि क्या एक ही भगवान की दो मूर्तियां या दो तस्वीरें एक साथ रखकर पूजा की जा सकती है? वास्तु और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा स्थल में मूर्तियों की संख्या और उनका सही स्थान विशेष महत्व रखता है। माना जाता है कि पूजा घर की ऊर्जा सीधे पूरे परिवार के वातावरण को प्रभावित करती है, इसलिए मूर्तियों को सोच-समझकर स्थापित करना चाहिए।
वास्तु विशेषज्ञ मान्या के अनुसार, घर के मंदिर में एक ही भगवान की दो समान मूर्तियां या दो तस्वीरें आमतौर पर रखने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है और परिवार के सदस्यों के बीच अनावश्यक तनाव, मतभेद और मानसिक अशांति बढ़ सकती है। धार्मिक दृष्टि से भी घर का मंदिर साधना और एकाग्रता का स्थान होता है, इसलिए वहां सादगी और संतुलन बनाए रखना शुभ माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी कारणवश एक ही भगवान की दो मूर्तियां घर में आ जाएं, तो उनमें से एक को किसी मंदिर में श्रद्धापूर्वक अर्पित कर देना या उचित धार्मिक विधि से किसी जरूरतमंद को दान कर देना बेहतर माना जाता है। वहीं, यदि कोई मूर्ति खंडित, टूटी हुई या क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसकी पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी मूर्ति को सम्मानपूर्वक किसी पवित्र नदी में विसर्जित करना या किसी पीपल अथवा अन्य पवित्र वृक्ष के नीचे स्थापित करना उचित माना जाता है।
घर के मंदिर में मूर्ति रखने के नियम
पूजा घर में देवी-देवताओं की अनावश्यक रूप से अधिक मूर्तियां न रखें।
घर के मंदिर में स्थापित मूर्तियों का आकार सामान्यत: 3 से 4 इंच तक रखना शुभ माना जाता है।
पूजा स्थान हमेशा साफ, व्यवस्थित और सुगंधित रखें।
मंदिर में नियमित रूप से दीपक, धूप और पूजा-अर्चना करने से सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
भगवान की मूर्तियों का मुख सामान्यत: पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है, जबकि पूजा करने वाला व्यक्ति पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठे।
मंदिर में टूटी-फूटी, धूल से ढकी या उपेक्षित मूर्तियां कभी न रखें।
पूजा घर में जूते-चप्पल, अनावश्यक सामान या इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं रखने से बचें।









