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पीपल के पेड़ की करें परिक्रमा, शनि प्रकोप से मुक्ति के लिए पूजा का खास है महत्व

शनिवार के दिन पीपल की पूजा करने का विशेष महत्व है। विशेषकर शनिवार के दिन पीपल की पूजा करने का विशेष महत्व है। पीपल में कई देवी-देवताओं का वास होता है। जड़ में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण और पत्तों में हरि बसते हैं। पीपल में पितरों और तीर्थों का भी वास होता है। वहीं, अगर आप शनि की साढ़े साती और ढैया से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो शनिवार के दिन पीपल की पूजा जरूर करें लेकिन पीपल की पूजा से भी कुछ नियम जुड़े हुए हैं। आइए, जानते हैं पीपल की पूजा से जुड़े नियम।

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पीपल की पूजा दोपहर में न करें
पौराणिक मान्यता है कि पीपल की पूजा दोपहर के समय नहीं करनी चाहिए। आप अगर शनि प्रकोप से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो पीपल पर शाम के समय दीपक जलाएं और हाथ जोडक़र जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।

पूर्व दिशा की तरफ मुख करके चढ़ाएं पीपल पर जल
पूर्व दिशा मुख करके जल चढ़ाना सबसे अच्छा माना जाता है। शनिवार को जल चढ़ाने से विशेष लाभ मिलता है। तांबे के लोटे में दूध, गुड़ और पानी मिलाकर जल चढ़ाएं। उत्तर दिशा में मुख करके पीपल की जड़ में जल चढ़ाना भी शुभ होता है।

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परिक्रमा विषम संख्या में
पीपल के पेड़ की परिक्रमा विषम संख्या में करना शुभ माना जाता है। 1, 3, 5, 7, 9, 11 जैसी विषम संख्याओं में परिक्रमा कर सकते हैं। 108 परिक्रमाएं सबसे ज्यादा शुभ होती हैं। इससे शनि प्रकोप से शांति मिलती है।

पीपल के पेड़ पर सरसों का दीया ही जलाएं
शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाने से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। संध्याकाल में सूर्यास्त के बाद सरसों का तेल डाल कर दीपक जलाना चाहिए। पीपल वृक्ष में दीपक जलाने से भी लाभ मिल सकता है। सरसों के तेल का प्रयोग करने से विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

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