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चौपाटी पर आइए, वाहन कहीं भी रखिए अपनी यातायात पुलिस कुछ नहीं बोलेगी

कार के पीछे कार, बाइक फंस जाती हैं कारों के बीच

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आप कार वाले का इंतजार कीजिए, फिर घर जाइए

शहीद पार्क से आने वाले भन्नाते रहते हैं कार वालों पर

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लोगों का सुझाव, चौपाटी के चारों ओर पेंट से घेरा बनाएं

उज्जैन। टॉवर के सामने की चौपाटी का रंगो-मिजाज शाम को देखते ही बनता है। दिन में कुछ ठेले लगते हैं। सूर्यास्त होते ही फव्वारे के चारों ओर बहार आ जाती है। फव्वारा बेशक अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है, लेकिन उसने अपने आंचल में कई लोगों को रोजगार देकर निहाल कर दिया है। यहां आने वाले खान-पान के शौकीनों ने यातायात की रंगत बिगाड़ दी है। यातायात पुलिस की लापरवाही से शहीद पार्क की ओर से आने वाले दुखी हो रहे हैं। चौपाटी के चारों ओर लगने वाले वाहनों के अंबार की ओर किसी का ध्यान नहीं है। लोग अपनी मर्जी के मालिक हो गए हैं।

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खासतौर पर कार चलाने वाले अपने ही शहर की यातायात व्यवस्था में पलीता लगा रहे हैं। शाम को जब यहां लोगों की आवाजाही होती है तब नजारा देखने लायक होता है। कई बार तो बाईक वाले कार चालकों से उलझते हुए देखे गए हैं। कारण यह है कि बाईक वाले पहले आते हैं और अपनी पसंदीदा खाद्य सामग्री के ठेले पर पहुंच जाते हैं।

खाने में थोड़ा समय तो लगता ही है, इतनी देर में कार वाले आ जाते हैं और बाईक पीछे कार पार्क कर देते हैं। वे अपने परिवार के साथ चौपाटी भ्रमण के लिए निकल जाते हैं। जब बाईक वाला आता और गाड़ी कार के बीच फंसी देखता है तो भन्ना जाता है। कई बार तो बाईक वाले ठेले दर ठेले पर जाकर पूछताछ करते देखे गए।  भाई साब, वो नीली रंग की कार आपकी है? नतीजतन, कार वाला ढूंढे से नहीं मिलता। पता चलता है कि वह अपने परिवार के साथ तमाखू बाजार में कुल्फी खाने गया होता है। इस प्रकार बाईक वाला कार के बीच उलझ कर रह जाता है।

गलत आदत से लगता है जाम : लोगों की गलत आदत के कारण टॉवर चौक पर जाम लग जाता है। शहीद पार्क की तरफ से आने वाले बड़े वाहनों को आगे निकलने में दिक्कत होती है। इधर अंबेडकर प्रतिमा के चारों ओर ठेले सज जाते हैं इसके साथ ई-रिक्शा और ऑटो खड़े हो जाते हैं। यहां यातायात पुलिस नजर नहीं आती। कभी कभार कोई पुलिस कर्मी दिखाई देता जो व्यवस्था बनाता है। उसके जाते ही हालात फिर बिगड़ जाते हैं।

इंदौर के 56 दुकान इलाके जैसी व्यवस्था हो

इंदौर में पलासिया के पास खानपान के लिए 56 दुकान इलाका बहुत मशहूर है। इंदौर आने वाले कई फिल्मी कलाकार भी वहां जा चुके हैं। अपनी टॉवर चौपाटी से ज्यादा भीड़ वहां होती है, लेकिन यातायात की समस्या नहीं रहती। कारण यह है कि सतत मॉनीटरिंग होती है। कोई व्यक्ति गलत पार्किंग करता है तो पुलिस कार्रवाई में देर नहीं करती।

वाहन चालकों में पुलिस और यातायाता पुलिस का खौफ है। अपने शहर के वाहन चालक बेखौफ हैं। लोगों का सुझाव है कि चौपाटी के आसपास सफेद पेंट से गोल घेरा बना देना चाहिए। इस घेरे में ही वाहन पार्क किए जाएं। यह घेरा वहां व्यापार करने वालों से बनवाया जाए। यदि नियम टूटे तो पुलिस या तो वाहन ले जाए धारा 183 की कार्रवाई करे। इससे यातायात व्यवस्था सुगम हो जाएगी।

(जाम और चौपाटी पर परेशानी झेलने वाले संजय व्यास, शैलेष शर्मा, घनश्याम उपाध्याय, मनोज गरेवाल, गोपाल सिंह चौहान, मुकेश शर्मा, पदम सिंह परिहार)

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