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दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी ऑटो पर रोक को लेकर चिंता

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सीएनजी (CNG) चालित तीन-पहिया वाहनों के नए पंजीकरण पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव ने विवाद खड़ा कर दिया है। ऑटोमोबाइल डीलर्स के शीर्ष संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) (फाडा) ने इस प्रस्तावित रोक पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। फाडा का तर्क है कि यह निर्णय सरकार की ही स्वच्छ ईंधन नीति के सिद्धांतों के विपरीत है। संगठन के अनुसार, इस कदम से प्रदूषण में तत्काल कमी आने के बजाय सड़कों पर पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या बनी रहेगी, जिससे व्यावहारिक और आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होंगी।

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क्या है सीएक्यूएम (CAQM) का आदेश और समयसीमा?

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जनों, विशेषकर PM2.5 के स्तर को कम करने के लिए केवल इलेक्ट्रिक L5 श्रेणी के तीन-पहिया वाहनों (ऑटो) के पंजीकरण को अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। दिसंबर 2025 में गठित एक विशेषज्ञ समिति की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने इसके लिए निम्नलिखित समयसीमा निर्धारित की है:

  • 1 जनवरी 2027 से: देश की राजधानी दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक L5 श्रेणी के तीन-पहिया वाहनों का ही नया पंजीकरण हो सकेगा।

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  • 1 जनवरी 2028 से: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के उच्च वाहन घनत्व वाले जिलों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में भी यही नियम प्रभावी होगा।

  • 1 जनवरी 2029 से: एनसीआर के अंतर्गत आने वाले शेष सभी जिलों में सीएनजी सहित अन्य ईंधनों से चलने वाले नए ऑटो के पंजीकरण पर पूर्ण रोक लग जाएगी।

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इसके अतिरिक्त, दिल्ली सरकार द्वारा अंतिम रूप दी जा रही नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति के मसौदे में भी अगले वर्ष जनवरी से केवल इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों के पंजीकरण की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

फाडा (FADA) की आपत्तियां और तार्किक विश्लेषण

फाडा की दिल्ली इकाई ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर इस नीतिगत निर्णय का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने अपनी आपत्ति के पक्ष में निम्नलिखित मुख्य बिंदु रेखांकित किए हैं:

  • पुराने वाहनों को हटाने का प्रावधान नहीं: फाडा के अनुसार, यह प्रतिबंध सड़कों पर वर्तमान में वैध परमिट के साथ चल रहे BS-IV या उससे पुराने ऑटो को हटाने में असमर्थ है।

  • नीति का उल्टा प्रभाव: नए नियमों के कारण अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाने वाले आधुनिक BS-VI मानक के सीएनजी वाहनों को बाजार में लाने का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, पुराने और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहन लंबे समय तक सड़कों पर बने रहेंगे, जो पर्यावरण नीति के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देता है।

  • आजीविका और सुलभ परिवहन पर संकट: दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी ऑटो सार्वजनिक परिवहन और ‘लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी की रीढ़ हैं। इस क्षेत्र से सीधे तौर पर लगभग 1 लाख ऑटो-रिक्शा परमिट धारकों, हजारों डीलरशिप कर्मचारियों, वाहन फाइनेंसरों और फ्लीट ऑपरेटरों का रोजगार जुड़ा हुआ है। अचानक पंजीकरण रोकने से इस पूरे तंत्र पर गहरा आर्थिक आघात लगेगा।

ऑटो उद्योग द्वारा सुझाया गया विकल्प

सीएनजी वाहनों के नए पंजीकरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के स्थान पर फाडा ने सरकार के समक्ष एक वैकल्पिक और व्यवस्थित योजना का प्रस्ताव रखा है:

  • स्क्रैपेज नीति और प्रोत्साहन: सरकार को एक ऐसी प्रोत्साहन आधारित योजना लानी चाहिए, जिसके तहत BS-IV और उससे पुराने तीन-पहिया वाहनों को अनिवार्य रूप से स्क्रैप (कबाड़) किया जाए।

  • आधुनिक ईंधन का विकल्प: स्क्रैप किए गए पुराने वाहनों के स्थान पर वाहन स्वामियों को आधुनिक BS-VI/OBD-II मानकों वाले सीएनजी अथवा इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन खरीदने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस संतुलित दृष्टिकोण से आम जनता के लिए किफायती परिवहन व्यवस्था भी बाधित नहीं होगी और वायु गुणवत्ता में भी सुधार देखा जा सकेगा।

आगे की राह और दो-पहिया वाहनों पर भी नजर

पारंपरिक दो-पहिया वाहन निर्माताओं ने भी दिल्ली सरकार की आगामी ईवी नीति के एक अन्य कड़े प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को पत्र लिखा है। इस प्रस्ताव के तहत 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में इलेक्ट्रिक को छोड़कर सभी प्रकार के पेट्रोल चालित दो-पहिया वाहनों के पंजीकरण को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उद्योगों और आम जनता की व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए सीएक्यूएम और दिल्ली सरकार अपने प्रस्तावों में कोई संशोधन करती है या नहीं।

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