अक्टूबर से महंगाई बढ़ने की चिंता, जानिए क्यों महंगा हो सकता है घर का बजट

अक्टूबर 2026 की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई के मोर्चे पर थोड़ी चिंता बढ़ा सकती है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 फीसदी पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आखिर इसके पीछे क्या वजह है? अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, मुख्य रूप से चार कारण महंगाई को बढ़ा सकते हैं।
1. कच्चे तेल की बढ़ती कीमत
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। सितंबर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल महंगा होने पर पेट्रोल-डीजल के अलावा ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और खेती में इस्तेमाल होने वाली कई चीजों की लागत भी बढ़ जाती है। इसका असर धीरे-धीरे रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
2. बारिश और फसलों पर असर
महंगाई बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतें हैं। बारिश कम या असमान रहने पर फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर सब्जियों और दूसरी खाने-पीने की चीजों पर पड़ता है। अगस्त में प्याज, लहसुन और अदरक जैसी चीजों की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगर फसल और सप्लाई से जुड़ी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो खाद्य महंगाई आगे भी दबाव बना सकती है।
3. सिर्फ खाना-पीना नहीं, दूसरी चीजें भी महंगी
महंगाई का दबाव अब केवल सब्जियों और ईंधन तक सीमित नहीं दिख रहा। अगस्त में कोर महंगाई भी बढ़ी। इसमें ईंधन और खाद्य पदार्थों को अलग रखकर दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी देखी जाती है। धातुओं और औद्योगिक सामान की कीमत बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ती है। आगे चलकर इसका असर तैयार सामान और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
4. कमजोर रुपया भी बढ़ा सकता है खर्च
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने का असर भी महंगाई पर पड़ता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और दूसरी जरूरी चीजें आयात करता है। रुपया कमजोर होने पर इन्हें खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसका असर पेट्रोलियम से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान और कई दूसरी आयातित वस्तुओं पर पड़ सकता है।
RBI की ब्याज दर पर भी नजर
महंगाई बढ़ने के बीच बाजार की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर रहेगी। कुछ अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ने की संभावना जताई है। अगर ऐसा होता है तो नए कर्ज महंगे हो सकते हैं और होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल महंगाई आगे किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमत, मौसम, खाद्य आपूर्ति और रुपये की चाल पर निर्भर करेगा। अगर इन मोर्चों पर राहत मिलती है तो महंगाई का दबाव भी कम हो सकता है।









