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हत्यारों को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

उज्जैन। हत्या के मामले में शनिवार को कोर्ट ने फैसला देते हुए ५ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और अर्थदंड से भी दंडित किया।
मीडिया सेल प्रभारी कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया घटना 28 मई २०२१ की है। इस दिन शाम 4 बजे गोविंद अपने मित्र सूरज एवं दीपक के साथ नानाखेड़ा स्थित ट्रेजर मॉल के पास खड़ा था तभी उसके पास किसी का कॉल आया जिसके बाद तीनों केटीएम शोरूम पहुंचे जहां अभियुक्त आकाश उर्फ भय्यू और सागर भाट पहले से मौजूद थे। आकाश ने गोविंद से कहा उसने नगर निगम में सूचना देकर उसके मवेशी क्यों पकड़वाए तब गोविंद ने कहा उसने मवेशी नहीं पकड़वाए। इसी बात को लेकर सागर एवं भय्यू उर्फ आकाश ने गोविंद के साथ गाली-गलौच की।

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गोविंद ने मना किया तो सागर, भय्यू उर्फ आकाश उसके साथ मारपीट करने लगे तभी वहां आशीष भाट, विशाल भाट व लाला भाट पाइप और लट्ठ लेकर आए और गोविंद को पीटने लगे। यह देख सूरज अपने दोस्त गोविंद को बचाने पहुंचा तो आकाश ने छूरे से सूरज पर हमला किया लेकिन छूरे को पकडऩे की कोशिश में सूरज की हथेली कट गई। इसी बीच गोविंद ने सूरज से पुलिस को बुलाने को कहा जिसके बाद सूरज नानाखेड़ा थाने की ओर भागा। इसके बाद दीपक ने भी गोविंद के घर पहुंचकर घटना की जानकारी उसकी मां लक्ष्मीबाई को दी। गोविंद को पहले सिविल अस्पताल फिर जेके और बाद में इंदौर के एमवाय अस्पताल ले जाया गया जहां गोविंद की मौत हो गई। पुलिस ने जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया।

अभियोजन पैरवीकर्ता अधिकारी ईश्वर सिंह केलकर विशेष लोक अभियोजक के तर्कों से सहमत होकर अरविंद प्रताप सिंह चैहान, विशेष न्यायाधीश (एससी.एस.टी एक्ट), जिला उज्जैन के न्यायालय ने आरोपी आकाश उर्फ भय्यू पिता प्रकाशचंद्र खींची, सागर पिता प्रकाशचंद्र खींची आशीष उर्फ आशु पिता अशोक उर्फ लाला, विशाल पिता अशोक उर्फ लाला, अशोक उर्फ लाला पिता हरि भाट सभी निवासी लोहार पट्टी नीलगंगा हालमुकाम लवकुश नगर द्वारिका आश्रम के पास, उज्जैन को धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया।

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दुष्कर्म के आरोपी को 12 साल की सजा

उज्जैन। नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के मामले में न्यायालय ने आरोपी को १२ साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और ६ हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया। मीडिया सेल प्रभारी कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया मामला 21 अप्रैल 2024 का है। फरियादिया ने परिजनों के साथ इंगोरिया पुलिस को दर्ज करवाई रिपोर्ट में बताया कि वह बर्तन धोने का काम करती है। कुछ छह भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी है। उसके घर के पीछे बबलिया उर्फ बबलू पिता शंकर नट रहता है। घटना वाले दिन उसके घरवाले उसकी फुफो की शादी में सागौर गए थे वह अकेली थी। सुबह करीब 8 बजे वह घर में बर्तन धो रही थी तभी बबलिया ने उसे आवाज लगाकर बाहर बुलाया और कहा कि बर्तन धोने के लिए वकील साहब के गार्डन में बुला रहे हैं, वह उसे बाइक से छोड़ देगा।

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इस पर वह बाइक पर बैठकर चली गई लेकिन गार्डन पहुंचने पर आरोपी ने गाड़ी नहीं रोकी तो उसने कहा कि कहां ले जा रहा है तो आरोपी ने कहा अभी घूमने चल बाद में गार्डन में छोड़ दूंगा। इसके बाद वह उसे काफी देर इधर-उधर घुमाता रहा और फिर चिकली काकड़ में एक सुनसान खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने धमकी दी कि किसी को बताया तो उसे व उसके परिवार को मार देगा। इसके बाद उसे मेन रोड पर छोड़ दिया।

फरियादिया पैदल घर पहुंची और परिजनों को घटना के बारे में बताया। उसकी रिपोर्ट पर केस दर्ज कर जांच शुरू की गई जिसके बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया। अभियोजन पैरवीकर्ता अधिकारी भारती उज्जालिया के तर्कों से सहमत होकर विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) रामबिलास गुप्ता ने आरोपी बबलू उर्फ बबलिया पिता शंकर नट निवासी मंगलनगर, ग्राम चिकली, बडऩगर को 12 साल के सश्रम कारावास और 6 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया।

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