CISF के आने से अनुशासित हो जाएगा मंदिर कैंपस, खत्म हो जाएगा लोकल हस्तक्षेप

महाकाल मंदिर की सुरक्षा सीआईएसएफ को सौंपने की मांग सांसद बालयोगी ने उठाई

प्रतिदिन 5 लाख श्रद्धालु, सिंहस्थ में संख्या होगी तिगुनी
अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। राज्यसभा में बजट सत्र के दौरान भगवान महाकालेश्वर मंदिर की सुरक्षा सीआईएसफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) को सौंपने के प्रस्ताव ने खलबली मचा दी है। राज्यसभा सदस्य डॉ. उमेशनाथ महाराज ने विशेष ध्यानाकर्षण के माध्यम से यह मुद्दा उठाया है। उन्होंने उज्जैन को नेशनल सिक्योरिटी ग्रिड का हिस्सा बनाने की मांग भी उठाई। अगर मंदिर की सुरक्षा सीआईएसएफ संभालती है तो मंदिर कैंपस अनुशासित हो जाएगा और हर तरह का लोकल हस्तक्षेप खत्म हो जाएगा।
सदन में डॉ. उमेशनाथ महाराज ने कहा कि काशी विश्वनाथ और अयोध्या धाम की तरह उज्जैन भी आज विश्व पटल पर सांस्कृतिक गौरव का केंद्र बन चुका है। वर्तमान में यहां औसतन 4 से 5 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन हेतु पहुंच रहे हैं लेकिन असली चुनौती सिंहस्थ है, यहां श्रद्धालुओं की संख्या साल में 15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इस विशाल जनसमूह के सुरक्षित प्रबंधन के लिए वर्तमान निजी सुरक्षा और स्थानीय पुलिस बल के साथ-साथ केंद्रीय विशेषज्ञता की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय और बढ़ती चुनौतियों के बीच अब मंदिर की सुरक्षा के लिए अधिक पेशेवर और केंद्रीय स्तर के दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
सीआईएसएफ से सुरक्षा प्राप्त प्रमुख स्थान
हवाई अड्डे- भारत के लगभग 65 से अधिक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे।
मेट्रो – दिल्ली मेट्रो (सबसे बड़ा नेटवर्क), मुंबई, कोलकाता, बैंगलुरु आदि।
औद्योगिक इकाइयां- सरकारी और निजी क्षेत्र के बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरियां, स्टील प्लांट और खदानें।
महत्वपूर्ण संस्थान- परमाणु ऊर्जा केंद्र, अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो), और प्रमुख बंदरगाह।
ऐतिहासिक व सरकारी भवन- दिल्ली में संसद भवन और ताजमहल जैसे प्रमुख स्मारक।
वीआईपी सुरक्षा- केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार खतरे के अनुसार जेड व जेड+ श्रेणियों के तहत सुरक्षा प्रदान करना।
प्रमुख मंदिर- काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), राम जन्मभूमि मंदिर (अयोध्या) और अयोध्या एयरपोर्ट की सुरक्षा सीआईएसएफ संभालती है। इसके अतिरिक्त, सीआईएसएफ कोणार्क मंदिर, एलोरा की गुफाएं, और बीबी का मकबरा जैसे एएसआई संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा के लिए भी जिम्मेदार है।
सीआईएसएफ के आने से क्या बदलाव होंगे
महाकाल मंदिर में व्यवस्था में सुधार करने के लिए लागू नियमों का सख्ती से पालन होगा। अनुशासन का पालन सख्ती से होगा।
लोकल हस्तक्षेप (जनप्रतिनिधि, अधिकारी, मीडिया या पुलिस, पंडे-पुजारी आदि का) पूर्णत: समाप्त होगा। व्यवस्थाएं नियमानुसार संचालित होगी। जैसा कि काशी विश्वनाथ और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में देखा जा सकता है।
सख्त अनुशासन से आए दिन होने वाले विवादों पर रोक लगेगी जिससे मंदिर की देशव्यापी छवि सुधरेगी।
सिंहस्थ में 15 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए रखे तीन प्रस्ताव
सीआईएसएफ और सिक्योरिटी ऑडिट- वर्तमान की मिश्रित सुरक्षा व्यवस्था (निजी गार्ड व स्थानीय पुलिस) के स्थान पर सीआईएसएफ जैसी विशेषज्ञ एजेंसी से नियमित सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और मुख्य परिसर की कमान उन्हें सौंपी जाए।
एआई और ड्रोन सर्विलांस- पूरे उज्जैन क्षेत्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्मार्ट क्राउड एनालिसिस तकनीक से लैस किया जाए, ताकि भीड़ के दबाव का सटीक आकलन हो सके।
एनडीआरएफ का स्थायी केंद्र- आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए उज्जैन में एनडीआरएफ का एक स्थायी क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किया जाए।









