कच्चा तेल $72 पर लौटा, लेकिन पेट्रोल-डीजल अभी नहीं होगा सस्ता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।
यह वही स्तर है, जहां कीमतें ईरान युद्ध से पहले थीं। लेकिन इसका फायदा आम लोगों को तुरंत नहीं मिलने वाला।

कच्चा तेल सस्ता क्यों हुआ?
- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हुआ।
- ईरानी तेल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में राहत मिली।
- होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी।
- वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बेहतर होने से कीमतें नीचे आ गईं।
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम अभी घटेंगे?
नहीं।
भारत में आज जो पेट्रोल-डीजल बिक रहा है, वह उस कच्चे तेल से बना है जिसे पहले 110–125 डॉलर प्रति बैरल की ऊंची कीमत पर खरीदा गया था।
यानी आज सस्ता हुआ तेल अभी भारत के पेट्रोल पंपों तक पहुंचा ही नहीं है।
सस्ता तेल पंप तक पहुंचने में कितना समय लगता है?
15–20 दिन → तेल लोड होने में
55–60 दिन → भारत पहुंचने में
कुछ दिन और → रिफाइनिंग और सप्लाई में
➡️ कुल समय: लगभग 75–80 दिन (करीब ढाई महीने)
फिर भी कीमतें तुरंत क्यों नहीं घटेंगी?
एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के अनुसार,
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अभी भी लगभग ₹7.5 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
- इसलिए कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई कर सकती हैं।
- उसके बाद ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना बनेगी।
राहत कब मिल सकती है?
अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत से हल्की राहत मिल सकती है।
दशहरे के आसपास पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की संभावना सबसे ज्यादा मानी जा रही है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा बड़ी तेजी आने की संभावना कम है, यदि कोई नया भू-राजनीतिक संकट नहीं होता।









