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DigiLocker के नाम पर छात्रों को ठग रहे साइबर अपराधी, फर्जी वेबसाइट से रहें सावधान

डिजिटल होते भारत में साइबर अपराधियों की हिम्मत भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अब जालसाजों ने एक ऐसा जाल बिछाया है जिसमें फंसना किसी के लिए भी आसान है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट पर एक फर्जी वेबसाइट सक्रिय है जो दिखने में बिल्कुल असली DigiLocker और CISCE पोर्टल जैसी लगती है। इस वेबसाइट का पता है — http://digilocker.cisceboard.org — और यह आम लोगों को धोखा देने के लिए खास तौर पर तैयार की गई है।

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इसका इंटरफेस इतना मिलता-जुलता है कि कोई भी सामान्य यूजर पहली नजर में इसे असली सरकारी पोर्टल समझ सकता है।

क्या भूलकर भी न करें इस वेबसाइट पर?

अगर गलती से भी आप इस फर्जी साइट पर पहुंच जाएं तो कुछ बातों का सख्ती से पालन करें —

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अपना नाम, पता, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर जैसी कोई भी निजी जानकारी यहां बिल्कुल दर्ज न करें। आधार कार्ड से जुड़ा कोई भी विवरण साझा करना खतरनाक साबित हो सकता है। फोन पर आया OTP इस साइट पर कभी न डालें — यही वह चाबी है जिससे ठग आपके खाते में सेंध लगाते हैं। किसी भी शुल्क या फीस के नाम पर पैसे देने की गलती न करें।

असली और नकली वेबसाइट की पहचान कैसे करें?

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक थोड़ी सी सतर्कता आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है। किसी भी वेबसाइट पर कुछ भी करने से पहले ये जांच जरूर करें —

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सबसे पहले URL यानी वेबसाइट का पता ध्यान से पढ़ें। भारत सरकार की असली वेबसाइटें हमेशा .gov.in या .nic.in पर खत्म होती हैं। ब्राउजर में HTTPS और सही डोमेन नाम देखें। कोई भी सरकारी काम हमेशा आधिकारिक पोर्टल से ही करें।

DigiLocker के लिए सिर्फ www.digilocker.gov.in या गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से डाउनलोड किया गया आधिकारिक ऐप ही इस्तेमाल करें।

WhatsApp, SMS और Email के लिंक से रहें दूर

व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल पर आने वाले किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सौ बार सोचें। ठग अक्सर इन्हीं माध्यमों से अपना जाल फैलाते हैं। सरकार ने साफ कहा है — “विश्वास करने से पहले जांचें।” यह छोटी सी आदत आपको बड़े फ्रॉड से बचा सकती है।

छात्रों और उनके परिवारों के लिए खास सलाह

CISCE बोर्ड के छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट और प्रमाणपत्र हमेशा आधिकारिक DigiLocker प्लेटफॉर्म से ही डाउनलोड करें। परीक्षा नतीजों के समय ठग इसी तरह की नकली साइटें बनाकर छात्रों और अभिभावकों को निशाना बनाते हैं।

अगर कोई संदिग्ध लिंक मिले तो उस पर क्लिक करने की बजाय तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करें। इस जरूरी जानकारी को अपने परिवार और दोस्तों तक भी पहुंचाएं ताकि वे भी इस जाल से महफूज रह सकें।

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