क्या 4 साल में मशीनों पर बढ़ जाएगी इंसानों की निर्भरता? DeepMind CEO की बड़ी चेतावनी

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में हो रही तीव्र प्रगति को लेकर गूगल डीपमाइंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेमिस हसबिस ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि दुनिया उस मोड़ के करीब पहुंच रही है, जहां मशीनें कई मामलों में मानव बुद्धि की बराबरी कर सकती हैं या उससे आगे निकल सकती हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन के लिए अब केवल कुछ वर्षों का समय बचा है।
आने वाला समय होगा बड़े बदलावों का संकेत
हसबिस के अनुसार अगले एक वर्ष में विकसित होने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां भविष्य की अत्यधिक शक्तिशाली तकनीकों की केवल प्रारंभिक झलक होंगी। उनका मानना है कि वर्तमान में जो परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं, वे आने वाले बड़े तकनीकी बदलावों का संकेत मात्र हैं।
सरकारों और नीति निर्माताओं को दी चेतावनी
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को केवल तकनीकी उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकारों, अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं को इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। साथ ही नई प्रणालियों को सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने से पहले कठोर सुरक्षा परीक्षण अनिवार्य किए जाने चाहिए।
क्या खुद को बेहतर बना रही है कृत्रिम बुद्धिमत्ता?
हसबिस ने बताया कि वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पूरी तरह से स्वयं को विकसित करने की स्थिति में नहीं पहुंची है, लेकिन सीमित स्तर पर वह अपने कार्यों में सुधार लाने में सक्षम हो रही है। विशेष रूप से संगणकीय प्रोग्राम निर्माण के क्षेत्र में इसकी सहायता से कार्य की गति और गुणवत्ता दोनों बढ़ी हैं।
कर्मचारियों की छंटनी पर जताई नाराजगी
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ती कर्मचारियों की छंटनी पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि यदि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किसी कर्मचारी की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ा रही है, तो कंपनियों को अपने कार्य का विस्तार करना चाहिए, न कि कर्मचारियों को नौकरी से निकालना चाहिए।
भविष्य में बढ़ेगी कुशल लोगों की मांग
हसबिस का मानना है कि औषधि अनुसंधान, खेल निर्माण, वैज्ञानिक खोज और अन्य अनेक क्षेत्रों में अभी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में कुशल अभियंताओं और शोधकर्ताओं की आवश्यकता भविष्य में और बढ़ सकती है।









