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कांग्रेस की गलती सुधारेगी डॉ. मोहन यादव सरकार

उज्जैन को मूर्तिकला केंद्र बनाने की तैयारी

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महाकाल लोक की 100 मूर्तियां अब बनेंगी पत्थर की

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के पास बने महाकाल लोक परिसर में स्थापित सप्तऋ षियों सहित 100 से अधिक फाइबर की मूर्तियों को पत्थर की बनाकर स्थापित की जाएंगी। कांग्रेस सरकार के समय हुई गलती को मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार सुधारने में जुट गई है। इतना ही नहीं उज्जैन को मूर्तिकला केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उज्जैन में मूर्तियां बनाकर चित्रकूट सहित प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों पर सप्लाई की जाएंगी।

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महालोक में सात ऋ षियों की मूर्ति बदलने का काम शुरू हो गया है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के अंतर्गत वर्कशॉप आयोजित कर सातों ऋ षियों के स्कैच तैयार कराकर मूर्तियों को आकार देने का काम तेज हो गया है। इसके बाद परिसर में लगी करीब 100 से ज्यादा मूर्तियों को भी बदकलर पत्थर की लगाई जाएंगी। इससे बरसों तक श्रद्धालु इनको निहार सकेंगे। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनवरी के पहले सप्ताह में ही इस सिलसिले में निर्णय ले लिया है और इस पर काम भी शुरू हो गया है। मूर्ति बनाने की वर्कशॉप विक्रमादित्य शोधपीठ के पास विक्रम कीर्ति मंदिर परिसर में भी आयोजित की जा रही है ताकि तेज गति से मूर्तियां बनाई जा सकें।

संस्कृति विभाग के निर्णय से सीएम खुश

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प्रदेश के संस्कृति विभाग ने महाकाल मंदिर के महालोक परिसर की सभी मूर्तियों को पत्थर की बनाने का निर्णय लिया है। सीएम डॉ. यादव ने मीडिया में खुलकर बोला है कि वे इस निर्णय से खुश हैं। सीएम ने कहा है कि श्रीमहाकाल लोक निर्माण के टेंडर में कांग्रेस ने गलती की। उन्हें मंदिर व्यवस्था की समझ नहीं थी। कांग्रेस शासनकाल में टेंडर हुआ था, जिसमें एफआरपी की प्रतिमा बनाने का प्रावधान था। काल के प्रवाह में दोबारा बनानी पड़ी।

मूर्तियां शहर की सुंदरता बढ़ाएंगी….

सरकार ने यह भी तय किया है कि वर्तमान में महालोक परिसर में एफआरपी की जो मूर्तियां हैं, उनको शहर के प्रमुख चौराहों और प्रवेश के मुख्य मार्ग पर लगाया जाएगा ताकि शहर की सुंदरता बढ़े और कांग्रेस सरकार के समय जो गलती हुई उसे सुधरा जा सके।

प्रदेश में पहुंचाई जाएंगी मूर्तियां

महाकाल लोक में सभी मूर्तियां बदलकर पत्थर की मूर्तियां स्थापित करने का सरकार ने निर्णय ले लिया है। उज्जैन में निरंतर वर्कशॉप लगाकर मूर्तियां प्रदेश के उन धर्मस्थलों पर भी उपलब्ध कराएंगे जहां आवश्यकता होगी।  -श्रीराम तिवारी, निदेशक महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ

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