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हे मंगलनाथ! क्या यही है कैमरे का सच…?

हर भातपूजा से 100 रु. की कमाई पर नजर!

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उज्जैन। देशभर में भातपूजा के लिए प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर के गर्भगृह में सरकारी सीसीटीवी कैमरे के अलावा निजी कैमरे लगाने का मामला उजागर होने के बाद मंदिर प्रशासन ने उन्हें हटा दिया है, लेकिन इन निजी कैमरों का सच चौंकाने वाला और बड़ा गंभीर है। बताया जा रहा है कि हर भातपूजा से मिलने वाली अघोषित ’दक्षिणा’ की कमाई पर नजऱ रखी जाती थी। प्रशासन इस मामले की जांच करे तो इस पर से पर्दा हट सकता है, लेकिन मामले में मंदिर समिति को पत्र मिलने के बाद भी जांच न कार्रवाई हो पाना गंभीर मामला है।

मंगलनाथ मंदिर के गर्भगृह में पुजारियों ने भी अपने सीसीटीवी कैमरे लगा दिए थे, जिनको मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष एसडीएम लक्ष्मीनारायण गर्ग के निर्देश पर हटा दिया गया है। अक्षरविश्व ने इस मामले को उजागर किया था। दिलचस्प मामला यह है कि ये कैमरे इसलिए लगाए गए थे ताकि भातपूजन के लिए ली जाने वाली अघोषित 100 रुपए की दक्षिणा पर नजर रखी जा सके। सूत्रों के अनुसार गर्भगृह में यह दक्षिणा प्रतिनिधियों द्वारा एकत्रित की जाती है। इसका हिसाब रखने के लिए ये कैमरे लगाए गए थे। निजी कैमरे लगाने से पुजारी घर बैठे यह हिसाब रखते थे कि कितनी भातपूजा हुई। खबर यह भी है कि कैमरे न होने से प्रतिनिधि ही यह राशि अपनी जेब में रख लेते थे। यह राशि किस किस की जेब में जाती है, इसका भी खुलासा प्रशासन द्वारा किया जा सकता है।

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मंदिर के बाहर लगा बोर्ड कह रहा कहानी
मंदिर के बाहर भी अवैध राशि न देने का बोर्ड लगा है, लेकिन यह भी एक औपचारिकता बनकर रह गया है। इसमें सूचना है कि यजमान 100 रुपए की राशि इच्छा से दे सकते हैं, लेकिन बाध्य नहीं कर सकते। मंदिर में एक दिन में 1700 भातपूजन भी होती है। प्रति भातपूजा पर 100 रुपए की दक्षिणा से एक दिन में 1 लाख 70 हजार की आय पुजारियों को हो जाती है, जिसका एक पैसा भी सरकारी खजाने में नहीं जाता। इस हिसाब से हर माह मंदिर प्रशासन को लाखों की चपत लग रही। अगर मंदिर प्रबंध समिति इस राशि को मंदिर कोष में जमा कराए तो दर्शनार्थियों के लिए कई विकास कार्य कराए जा सकते हैं।

3 साल पहले आया पत्र, कहां दबा?: गर्भगृह में भातपूजन से पहले पंडितों को 100 रुपए की दक्षिणा देने के मामले में मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक को पत्र मिल चुका है। जुलाई 2022 में मिले पत्र में कहा था कि भातपूजा के लिए तय शासकीय राशि के अलावा 100 रुपए लेने पर प्रतिबंध लगाया है। लेकिन पत्र सरकारी फाइलों के बीच दबकर रह गया। सवाल उठता है कि प्रशासन मामले को लेकर गंभीर क्यों नहीं जबकि तीन साल में ली गई राशि का हिसाब लगाया जाए तो बड़ा आंकड़ा सामने आ सकता है। एसडीएम गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन मोबाइल अटेंड नहीं किया।

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