Popup Image
Advertisement

नवमी पर मां सिद्धिदात्री को कैसे करें प्रसन्न? जानें पूजा विधि और आरती

मां सिद्धिदात्री पूजा विधि के अनुसार, नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन को महानवमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की आराधना करने से सुख-समृद्धि, ज्ञान और आत्मविश्वास का आशीर्वाद मिलता है। नवमी पर पूजा के साथ हवन और कन्या पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, भोग, मंत्र, रंग और आरती के बारे में।

Advertisement

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

नवरात्रि की नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

Advertisement
  • मां को रोली, अक्षत, फूल, फल और नारियल अर्पित करें।
  • दीपक और धूप जलाकर मां सिद्धिदात्री का ध्यान करें।
  • मां के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
  • सात्विक भोग लगाकर मां की आरती करें।
  • अपनी परंपरा के अनुसार हवन और कन्या पूजन करें।
  • कन्याओं को भोजन कराकर सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार दें।
  • पूजा के दौरान मन को शांत रखें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

 

मां सिद्धिदात्री

Advertisement

ये समय प्रकाशित करने से पहले स्थानीय पंचांग से सत्यापित कर लें, क्योंकि तिथि और मुहूर्त की गणना स्थान के अनुसार अलग हो सकती है।

मां सिद्धिदात्री को किस चीज का भोग लगाएं?

नवमी पर मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी, काले चने, फल और अन्य सात्विक पकवान अर्पित किए जाते हैं। कई घरों में इसी प्रसाद को कन्या पूजन के दौरान भी वितरित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां को श्रद्धा से भोग लगाने और जरूरतमंदों की सहायता करने से मन को संतोष मिलता है। भोग बनाते समय साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखें।

 

मां सिद्धिदात्री

नवमी पर कौन-सा रंग पहनना शुभ माना जाता है?

नवरात्रि के नौवें दिन के लिए बैंगनी रंग को कई जगह शुभ माना जाता है। हालांकि, नवरात्रि के दिन का रंग अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार बताया जा सकता है। पूजा में साफ और सुविधाजनक वस्त्र पहनना अधिक महत्वपूर्ण है। मां सिद्धिदात्री को कमल के फूल अर्पित किए जाते हैं। भक्त अपनी उपलब्धता और श्रद्धा के अनुसार अन्य सुगंधित फूल भी चढ़ा सकते हैं।

मां सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री माता, जय सिद्धिदात्री।

भक्तों के दुख हरने वाली, जग की सुखदात्री॥

कमल आसन पर विराजो, मुख पर तेज निराला।

तेरी कृपा से माता, जग में हो उजियाला॥

चार भुजाओं वाली माता, महिमा अपरंपारा।

तेरे चरणों में मैया, जीवन है हमारा॥

ज्ञान और सद्बुद्धि देना, रखना लाज हमारी।

सुख-समृद्धि से भर देना, मैया दुनिया सारी॥

जय सिद्धिदात्री माता, जय सिद्धिदात्री।

सब पर कृपा बरसाने वाली, जग की सुखदात्री॥

यह भी पढ़े:: कब होगा मां दुर्गा का विसर्जन? जानें शुभ मुहूर्त और रवि योग

यह भी पढ़े: आज का राशिफल (19 अक्टूबर 2026)

नवमी पर कन्या पूजन का क्या महत्व है?

महानवमी पर कन्या पूजन की परंपरा का विशेष महत्व है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है। कई परिवारों में कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराने की परंपरा है। कन्या पूजन के बाद सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा दी जाती है। यह परंपरा श्रद्धा, सम्मान और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है।

नवरात्रि की नवमी मां सिद्धिदात्री की आराधना का महत्वपूर्ण दिन है। इस अवसर पर पूजा, मंत्र जाप, भोग, हवन और कन्या पूजन किया जाता है। भक्त मां से सुख-समृद्धि, ज्ञान और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। पूजा करते समय अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार विधि अपनाएं।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें