कब होगा मां दुर्गा का विसर्जन? जानें शुभ मुहूर्त और रवि योग

शारदीय नवरात्रि का त्योहार अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने के बाद भक्त विजयादशमी के दिन माता रानी को विदाई देते हैं। इस दौरान घरों और दुर्गा पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस साल दुर्गा विसर्जन की तारीख और महाअष्टमी की तिथि को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं। ऐसे में आइए जानते हैं दुर्गा विसर्जन 2026 की तारीख, शुभ मुहूर्त और अष्टमी से जुड़ी जरूरी जानकारी।
दुर्गा विसर्जन 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन आमतौर पर आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि यानी विजयादशमी के दिन किया जाता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा करने के बाद मां को विदाई देते हैं और अगले साल फिर आने की प्रार्थना करते हैं। साल 2026 में विजयादशमी और दुर्गा विसर्जन की तारीख को लेकर अलग-अलग पंचांगों में अंतर दिखाई दे रहा है। कुछ पंचांगों में दुर्गा विसर्जन 20 अक्टूबर को बताया गया है, जबकि कुछ में 21 अक्टूबर की तारीख दी गई है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग और पूजा परंपरा के अनुसार तारीख तय करना बेहतर होगा।
दुर्गा विसर्जन का शुभ मुहूर्त क्या है?
दिल्ली के लिए उपलब्ध एक पंचांग के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 को दुर्गा विसर्जन का शुभ समय सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 41 मिनट तक बताया गया है। इसकी कुल अवधि लगभग 2 घंटे 16 मिनट है। हालांकि, दूसरे पंचांगों में 20 अक्टूबर को भी विसर्जन का मुहूर्त दिया गया है। इसलिए विसर्जन की तैयारी करने से पहले अपने शहर के अनुसार शुभ समय की पुष्टि जरूर कर लें। धार्मिक परंपरा में दशमी तिथि के दौरान विसर्जन करना शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में श्रवण नक्षत्र के संयोग को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
रवि योग और श्रवण नक्षत्र का क्या है महत्व?
ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को शुभ योगों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस योग में पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य करना अच्छा माना जाता है। इसी तरह श्रवण नक्षत्र का भी विजयादशमी और दुर्गा विसर्जन से संबंध बताया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए धार्मिक अनुष्ठान शुभ फल प्रदान करते हैं। हालांकि, रवि योग और श्रवण नक्षत्र का सही समय स्थान के अनुसार पंचांग से जांचना चाहिए।
मां दुर्गा को विदाई देने की पूजा विधि
दुर्गा विसर्जन के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मां दुर्गा की पूजा करें और दीपक जलाकर आरती उतारें। माता को फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित करें। दुर्गा पूजा की कुछ परंपराओं में विसर्जन से पहले विवाहित महिलाएं सिंदूर खेला की रस्म निभाती हैं। इस दौरान वे मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। पूजा के बाद मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना की जाती है। फिर श्रद्धा के साथ प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। विसर्जन के दौरान स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्रतिमा का विसर्जन निर्धारित स्थान पर ही करें।
मां दुर्गा की विदाई पर भक्त क्यों होते हैं भावुक?
नवरात्रि के नौ दिन भक्त मां दुर्गा की आराधना में बिताते हैं। घरों और पंडालों में पूजा, भजन, गरबा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। विजयादशमी के दिन जब मां की प्रतिमा को विदाई दी जाती है, तो भक्त भावुक हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा की विदाई उनके अगले साल फिर आने की उम्मीद के साथ की जाती है। भक्त माता रानी से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
जय माता दी!








