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खामेनेई की अंतिम यात्रा पर भारत का आभार, ईरान ने जताई दोस्ती

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने पर ईरान ने भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है। भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने इस कदम को दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान की एक मजबूत अभिव्यक्ति बताया है। दूतावास का कहना है कि दुख की इस घड़ी में भारत की यह एकजुटता दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को प्रदर्शित करती है।

 

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बीते शुक्रवार को भारत का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल विशेष रूप से तेहरान पहुंचा था। इस दल में बिहार के राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा शामिल थे। गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में तेहरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के दौरान 86 वर्षीय अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। भारतीय दल ने वहां पहुंचकर दिवंगत नेता को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

श्रद्धांजलि देने पहुंचे कई भारतीय नेता:

इस आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के अतिरिक्त भारत के कई अन्य प्रमुख राजनेता भी इस दुखद मौके पर एकजुटता दिखाने पहुंचे। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती शामिल थीं। इनके साथ ही भारत के सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदायों के प्रमुख धर्मगुरुओं ने भी तेहरान पहुंचकर दिवंगत ईरानी नेता को नमन किया और अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए ईरानी दूतावास ने लिखा कि तेहरान प्रशासन भारत की इस सच्ची दोस्ती, सहानुभूति और सम्मान के कदम को हमेशा याद रखेगा। दूतावास ने विशेष रूप से भारतीय विद्वानों, सांसदों और विभिन्न धर्मों के गुरुओं की उपस्थिति को सराहा और कहा कि संकट के इस समय में भारत का साथ दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों की नींव को भविष्य के लिए और अधिक मजबूत बनाएगा।

इतिहास का सबसे बड़ा जनसैलाब:

ईरान के सरकारी मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, सोमवार सुबह जब तेहरान की सड़कों पर अयातुल्ला खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू हुई, तो वहां का नजारा अभूतपूर्व था। इसे देश के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी जनसभा या विदाई माना जा रहा है, जिसमें लाखों की तादाद में नागरिक सड़कों पर उतर आए। खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के पार्थिव शरीरों को ईरान के राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर एक विशाल ट्रक पर रखा गया था, जिसे किसी पवित्र दरगाह की तरह सजाया गया था।

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काले वस्त्र धारण किए हुए लाखों लोगों की भीड़ इस विदाई वाहन को स्पर्श करने के लिए व्याकुल दिखाई दी। लोग श्रद्धापूर्वक अपने स्कार्फ और अन्य वस्त्रों को ताबूत से स्पर्श कराने के लिए सुरक्षाकर्मियों की ओर उछाल रहे थे। भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन द्वारा भीड़ पर पानी की बौछारें भी की जा रही थीं। लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार लोगों से संयम बनाए रखने और धीरे-धीरे आगे बढ़ने की अपील की जा रही थी।

मश्हद में दी जाएगी अंतिम विदाई:

रिवॉल्यूशनरी गार्ड के जनरल हसन हसनजादेह ने मीडिया को जानकारी दी कि इन ताबूतों को तेहरान की सड़कों पर लगभग 12 घंटे की लंबी यात्रा पूरी कराने के बाद मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ले जाया जाएगा। वहां से इन्हें आगे के गंतव्य के लिए रवाना किया जाएगा। इस ऐतिहासिक विदाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।

ईरान में बीते शनिवार से शुरू हुआ आधिकारिक राष्ट्रीय शोक आगामी गुरुवार तक जारी रहेगा। इसके बाद दिवंगत नेता खामेनेई को उनके जन्मस्थान मश्हद में स्थित प्रसिद्ध ‘इमाम रजा दरगाह’ के परिसर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा और शोक की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे ईरान में सड़कों से लेकर हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) तक को पूरी तरह बंद रखने का फैसला किया गया है।

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