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इंदौर में पेंशन कार्ड और इंस्टाग्राम ठगी, बुजुर्ग व छात्रा शिकार

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के लसूडिया क्षेत्र में ऑनलाइन फ्रॉड के तीन बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। शातिर ठगों ने अलग-अलग लोगों को निशाना बनाते हुए पेंशन कार्ड बनवाने, मोबाइल हैक करने और सोशल मीडिया पर सस्ती बाइक बेचने का झांसा दिया। इन तीन वारदातों के जरिए पीड़ितों के बैंक खातों से कुल 4.57 लाख रुपये से अधिक की रकम उड़ा ली गई। तीनों ही मामलों में लसूडिया थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

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पेंशन कार्ड और मोबाइल हैकिंग से फ्रॉड:

पहली घटना सेटेलाइट टाउनशिप के 75 वर्षीय बुजुर्ग अखिलेश गायकवाड़ के साथ हुई। उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया और कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर पेंशन कार्ड जारी करने का झांसा दिया। बुजुर्ग ने भरोसा करके अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड की गोपनीय जानकारी और ऑनलाइन फोटो शेयर कर दी। इसके बाद ठग ने उनका मोबाइल हैक कर लिया और खाते से 1.39 लाख रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने तुरंत इसकी शिकायत साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज कराई।

दूसरा मामला स्लाइस-सी सेक्टर के रहने वाले गोपाल वाकड़े का है, जिनका मोबाइल अचानक बंद हो गया था। जब उन्होंने किसी तरह अपना फोन दोबारा चालू किया, तो उनके होश उड़ गए। उनके मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने के मैसेज आए हुए थे। ठगों ने उनका डिवाइस हैक करके बैंक खाते से दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1.42 लाख रुपये की बड़ी रकम पार कर दी थी। बैंक से पूरी स्टेटमेंट निकालने के बाद पीड़ित ने पुलिस की शरण ली।

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इंस्टाग्राम विज्ञापन के झांसे में आई छात्रा:

तीसरी वारदात राजाबाग कॉलोनी में किराए से रहने वाली छात्रा पूजा झमेले के साथ हुई। पूजा ने इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते समय एक लुभावना विज्ञापन देखा, जिसमें मात्र 25 हजार रुपये में दोपहिया वाहन देने का दावा किया गया था। सस्ते के चक्कर में छात्रा ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया, जहां ठगों ने पहले बुकिंग के नाम पर 2 हजार रुपये जमा कराए। इसके बाद गाड़ी की फर्जी तस्वीरें भेजकर ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर 11,500 रुपये और वसूल लिए।

इसके बाद भी जालसाज रुके नहीं और फाइल चार्ज, इंश्योरेंस व अन्य फर्जी कागजातों के बहाने बार-बार पैसे ट्रांसफर करवाते रहे। इस तरह छात्रा के खाते से कुल 1.76 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। जब कई दिनों तक गाड़ी की डिलीवरी नहीं हुई और आरोपियों के नंबर बंद आने लगे, तब छात्रा को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ। पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबर्स को ट्रेस कर रही है, जिनमें यह पैसा ट्रांसफर हुआ है।

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