पहाडिय़ों में विराजित मां तुलजा भवानी दिन में तीन रूप बदलने की मान्यता

गुफा बर्डा मंदिर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था, उज्जैन की भर्तृहरि गुफा तक गुप्त मार्ग की भी प्रचलित है रहस्यमयी कथा
अक्षरविव न्यूज आगर-मालवा। पहाडिय़ों और घने जंगलों के बीच मां तुलजा भवानी का प्राचीन मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्राकृतिक गुफा में विराजित माता के इस मंदिर को स्थानीय लोग ‘गुफा बर्डा माता मंदिर’ के नाम से भी जानते हैं। यहां माता के दिन में तीन बार स्वरूप बदलने की मान्यता प्रचलित है। मंदिर से जुड़ी रहस्यमयी गुफा और प्राचीन लोककथाएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं।
पुजारी मनीष शर्मा के अनुसार मां तुलजा भवानी का यह प्राचीन मंदिर जिला मुख्यालय आगर-मालवा से पूर्व दिशा में लगभग दो किलोमीटर दूर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। कानड़ रोड से दक्षिण दिशा में इसकी दूरी करीब एक किलोमीटर है। मंदिर के आसपास घना जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य फैला हुआ है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस स्थल को धार्मिक श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।
यहां पहुंचने के लिए इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा लगभग 126 किलोमीटर और उज्जैन रेलवे स्टेशन करीब 68 किलोमीटर दूर है। इतिहासकारों और स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, इस स्थान को बौद्धकालीन माना जाता है। गुफा के भीतर पथरीली दीवार पर सिंदूर से सजी माता की प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है। प्रतिमा के पीछे परिक्रमा मार्ग भी बना हुआ है। भक्तों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1945 से निरंतर किए जाने की जानकारी मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां तुलजा भवानी छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी मानी जाती हैं। इस कारण मंदिर का महत्व केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मराठा इतिहास से जुड़ी धार्मिक विरासत के रूप में भी देखा जाता है।
सुबह बालिका, दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा स्वरूप
मंदिर से जुड़ी सबसे प्रमुख मान्यताओं में माता के दिन में तीन बार स्वरूप बदलने की कथा शामिल है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सुबह माता बाल रूप में, दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा के स्वरूप में दर्शन देती हैं। यह मान्यता लंबे समय से स्थानीय जनविश्वास और श्रद्धा का हिस्सा बनी हुई है।
उज्जैन की भर्तृहरि गुफा तक गुप्त मार्ग की जनश्रुति
प्राकृतिक गुफा से जुड़ी एक रहस्यमयी जनश्रुति भी प्रचलित है। गुफा के भीतर से एक गुप्त मार्ग उज्जैन स्थित राजा भर्तृहरि की गुफा तक जाता था। उज्जैन के तत्कालीन पुरातत्ववेत्ता एमपी. द्विवेदी ने भी इस मार्ग की खोज के प्रयास किए थे। हालांकि, इस गुप्त मार्ग के अस्तित्व की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। एक अन्य लोकमान्यता के अनुसार, वर्षों पहले मंदिर में आरती के समय शेर आते थे और बिना किसी को नुकसान पहुंचाए वापस जंगल में लौट जाते थे। यह भी कहा जाता है कि मां तुलजा भवानी महाराष्ट्र के तुलजापुर से उज्जैन होते हुए गुफा मार्ग से आगर में विराजित हुईं हैं।
नवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ नौ दिवसीय आराधना शुरू होती है। नगर पालिका परिषद द्वारा देश और नगर की सुख-शांति की कामना से घट स्थापना की जाती है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह पांच बजे होने वाली महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। सामान्य दिनों में सैकड़ों और नवरात्रि के दौरान हजारों भक्त माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन गुफा, ऐतिहासिक मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के कारण मां तुलजा भवानी का गुफा बर्डा मंदिर मालवा अंचल में आस्था का विशिष्ट केंद्र बना हुआ है। यहां श्रद्धालुओं को धार्मिक विश्वास के साथ आध्यात्मिक शांति का अनुभव भी होता है।








