कथक में नन्हें कदमों से नापा आसमां, मां के सपने को किया साकार

उज्जैन। कहते हैं यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कितनी भी चुनौतियां क्यों ना आएं, आपको चमकने से कोई रोक नहीं सकता। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है शहर की उभरती नृत्यांगना वैदेही पंड्या ने। महज 13 साल की छोटी सी उम्र में अपने नन्हें कदमों से वैदेही ने आसमान नाप दिया है। उन्होंने दिखाया कि प्रतिभा कभी किसी की मोहताज नहीं होता है, अथक मेहनत से उसे शिखर पर पहुंचाया जा सकता है।

मां को था डांस का शौक बेटी ने ख्वाब को सच किया
वैदेही बताती हैं 5 वर्ष की उम्र से शास्त्रीय नृत्य कथक की ट्रेनिंग लेना शुरू की। उनकी मां चेतना पंड्या को भी डांस का शौक था लेकिन उस वक्त इतने अवसर नहीं थे। लिहाजा उनके सपने को मैंने अपने अंदर संजोया और उसे सच कर रही हूूं। अब मां भी डांस का प्रशिक्षण लेकर अपना सपना जी रही हैं।
पढ़ाई में हमेशा अव्वल और दिनभर का शेड्यूल फिक्स
कक्षा सातवीं की छात्रा वैदेही बताती हैं दिनभर का शेड्यूल फिक्स है। सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक स्कूल होता है। इसके बाद एक घंटे की कोचिंग और शाम 6 से 8 बजे तक जानी मानी नृत्यांगना और गुरु पद्मजा रघुवंशी से कथक का प्रशिक्षण लेती है। घर पहुंचने के बाद दो घंटे पढ़ाई को देती हैं और फिर सोने चली जाती हैं।
मोबाइल से लगाव नहीं…
वर्तमान में जिस तरह बच्चे सोशल मीडिया पर घंटों बिताते हैं, उसी तरह वैदेही को मोबाइल से खास लगाव नहीं और ना ही सोशल प्लेटफॉर्म या गेम्स में कोई खास रुचि। वह केवल मनोरंजन के लिए कुछ देर इसका इस्तेमाल करती हैं। इस दौरान मां चेतना पंड्या भी यह ध्यान रखती हैं कि फोन का इस्तेमाल उसकी आदत ना बने।
उपलब्धियां
– वर्ष 2022 में उज्जैन गॉट टैलेंट की रनरअप रहीं।
– वर्ष 2022 में ही भोपाल में हुई राज्य स्तरीय बालरंग स्पर्धा के कनिष्ठ वर्ग में कथक में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
– 2024-2025 में सीसीआरटी, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की छात्र वृत्ति के चयनित। मप्र से 2 ही नृत्यांगना का चयन हुआ, वैदेही उसमें से एक।
– वर्ष 2025 में रतलाम में लोकनृत्य में उभरती हुई कलाकार के रूप में कला मोहन सम्मान से सम्मानित।









