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अब सुबह कोई नहीं पुकारेगा नाम

स्मृति शेष… राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ सदस्य अवधूत काले का निधन

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उल्लास वैद्य उज्जैन। 82 साल की उम्र में भी रोजाना सुबह स्वयंसेवकों के घर पर नाम की पुकार लगाने वाले आरएसएस के वरिष्ठ स्वयंसेवक अवधूत काले का शनिवार को निधन हो गया। वह अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। अंतिम यात्रा बसंतविहार स्थित निवास से निकली, इसमें बड़ी संख्या में आरएसएस और उसके सहयोगी संगठन से जुड़े लोग शामिल हुए।

पेशे से अभिभाषक रहे काले उज्जैन में आरएसएस की पहली पीढ़ी के स्वयंसेवक थे। उन्होंने उस दौर में संघ का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया, जब लोग सरकार के डर से संघ से जुडऩे से बचते थे। संघ की पहली पीढ़ी के स्वयंसेवक काले ने शाखा को व्यायाम केंद्र के साथ राष्ट्रनिर्माण की कार्यशाला बना दिया।

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समय की चुनौती कैसी भी रही हो, काले जी ने संयमित और दृढ़ चरित्र से हर स्वयंसेवक में हमेशा जोश भरा। संघ शिक्षा वर्गों में उनके अनुशासन और समर्पण की मिसाल दी जाती थी। वे कहते थे कि स्वयंसेवक वही है, जो अपनी पहचान संगठन से पाए और संगठन की पहचान अपने आचरण से दुनिया को कराए। काले जी व्यक्तिगत जीवन में सरल, सादगीप्रिय और मितभाषी रहे। उनकी छवि ऐसे स्वयंसेवक की थी, जो मौन रहकर अपना काम करता है और दूसरों को आगे बढ़ाने में विश्वास करता है।

उम्र में 80 से ऊपर होने के बावजूद उनकी दिनचर्या अनुशासन और नियमितता का जीता-जागता उदाहरण थी। रोजाना शाखा में उनकी उपस्थिति और साइकिल से भ्रमण करते हुए घरों में संपर्क करना उनकी आदत में शुमार था। बाल स्वयंसेवक से शुरू हुआ उनका सफर वनवासी कल्याण परिषद तक जारी था।]

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झोली फैलाने में संकोच नहीं किया
आदिवासी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वह लोगों के सामने अपनी झोली फैलाने में संकोच नहीं करते थे। उनका व्यवहार और प्रभाव ऐसा था कि उनकी झोली भी सदैव भरी रहती थी। वे संघ की उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में न सिर्फ संघ का पौधा रोपा, बल्कि उसे सींचा और अपने तप, त्याग व कर्मठता से उसे विशाल वटवृक्ष बनाया। काले जी देहरूप में भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, कितु उनकी कार्यनिष्ठा, सादगी, आत्मीय स्नेह संघ के हजारों कार्यकर्ताओं के मन में सदैव जीवित रहेगा। उनके मूल्यों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

(लेखक डॉ. हेडगेवार स्मृति सेवा न्यास के अध्यक्ष हैं।)

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