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जिस मार्ग से गुजरेगी भगवान महाकाल की सवारी, उसकी सुध नहीं ले रहे अधिकारी

रामानुजकोट के सामने बाउंड्रीवॉल गिरी, नालियों की फर्शियां और सड़कें भी उधड़ीं

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:श्रावण और भादव मास में भगवान महाकालेश्वर की सवारियां निकलना है। पारंपरिक सवारी मार्ग की अब तक प्रशासन के अफसरों द्वारा सुध नहीं ली गई है। इधर रामानुजकोट के सामने सीढिय़ों के पास बनी बाउण्ड्री मिट्टी के दबाव से गिर गई है तो इसी मार्ग की नालियों की फर्शियां उखड़ी पड़ी हैं। सड़कों पर गड्ढे हैं। ऐसे में सवारी के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

 

प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी भगवान महाकालेश्वर सवारी के रूप में नगर भ्रमण को श्रावण और भादौ मास में निकलेंगे। सवारी की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन द्वारा सभी विभागों की बैठक के साथ ही सवारी के स्वरूप को लेकर मंदिर प्रबंध समिति की बैठकों का दौर जारी है, लेकिन सवारी मार्ग की चिंता संबंधित विभाग नगर निगम को अब तक नहीं है।

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दो दिन पहले हुई हल्की बारिश के बाद रामानुजकोट के सामने रूद्रसागर नाले के पंपिंग हाऊस के पास बनी बाउण्ड्री टूटकर गिर चुकी है। नदी की ओर जाने वाले मार्ग की स्थिति यह है कि सीढिय़ों का रास्ता जर्जर है और यहां से बहने वाली नालियों की फर्शियां सफाईकर्मियों ने 6 माह पहले हटाई जो आज तक नालियों पर रखी नहीं गई है। सड़कों पर गड्ढे हैं।

तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं का अनुमान

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भगवान महाकालेश्वर की सवारी देखने देश भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। प्रशासन का अनुमान है कि इस वर्ष पहली सवारी में ही 3 लाख से अधिक श्रद्धालु शहर में आएंगे। ऐसे में सवारी मार्ग को पहले से व्यवस्थित करना भी जरूरी है।

इन मार्गों से गुजरती है महादेव की सवारी

महाकालेश्वर मंदिर से महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, कहारवाड़ी होते हुए हरसिद्धि की पाल, रामानुजकोट से सीधे शिप्रा नदी के तट पर सवारी पहुंचती है। यहां पर मां शिप्रा के जल से भगवान महाकाल का पूजन अर्चन करने के बाद वापसी में भगवान महाकाल की सवारी रामानुजकोट के सामने से होते हुए कार्तिक चौक, ढाबारोड़, छत्रीचौक लोहे की टंकी, छत्रीचौक होते हुए गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, बर्तन बाजार, गुदरी चौराहा से महाकालेश्वर मंदिर पहुंचती है।

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