महाकाल मंदिर में पुरानी दर्शन व्यवस्था बहाल

न्यू ईयर के बाद अब श्री महाकाल महोत्सव की तैयारियों में जुटा मंदिर प्रशासन
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सिंगर शंकर महादेवन और सोना महापात्रा देंगे प्रस्तुतियां, 5 दिनों तक भक्ति और संस्कृति का संगम
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। न्यू ईयर की छुट्टियों में आई दर्शनार्थियों की भीड़ की व्यवस्था में जुटा महाकाल मंदिर प्रशासन अब नए कार्यक्रम की तैयारियों में जुट गया है। 14 जनवरी से श्री महाकाल महोत्सव शुरू हो रहा है। इसमें देशभर के कलाकार जुटेंगे। इस कार्यक्रम में सिंगर शंकर महादेवन और सोना महापात्रा जैसे कलाकार भी शिरकत करेंगे। क्रिसमस से लेकर न्यू ईयर तक 8 दिनों में भगवान महाकाल का दर्शन करने के लिए काफी संख्या में दर्शनार्थी उज्जैन पहुंचे थे। इस कारण मंदिर समिति ने भीड़ नियंत्रण के उद्देश्य से दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया था। अब न्यू ईयर की भीड़ समाप्त होने के बाद 6 जनवरी से पुन: पुरानी दर्शन व्यवस्था प्रारंभ कर दी है जिसके तहत गेट नंबर चार, गेट नंबर 1, अवंतिका द्वार आदि से दर्शनार्थियों को प्रवेश पहले की तरह ही दिया जा रहा है।
सांस्कृतिक विरासत की छटा बिखेरेगी
मंदिर प्रबंध समिति द्वारा पहली बार 14 से 18 जनवरी तक ‘श्री महाकाल महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। पांच दिवसीय इस महोत्सव में देश के ख्याति प्राप्त कलाकार महाकाल के चरणों में स्वर साधना करेंगे, वहीं लोक कलाकारों के दल सांस्कृतिक विरासत की छटा बिखेरेंगे। महोत्सव का भव्य शुभारंभ 14 जनवरी को शाम 7 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में होगा। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया और राज्यसभा सांसद उमेशनाथ महाराज विशेष अतिथि रहेंगे। आयोजन से महाकाल लोक और त्रिवेणी संग्रहालय के परिसर में शाम 7 बजे से होगा।
सितारों से सजेगी शाम
महोत्सव की शुरुआत 14 जनवरी को मुंबई के प्रसिद्ध पाश्र्व गायक शंकर महादेवन और सिद्धार्थ शिवम की ‘शिवोहम’ सांगीतिक प्रस्तुति से होगी। 15 जनवरी को ‘ग्रेट इंडियन क्वायर’ के कलाकार ‘शिवा’ विषय पर प्रस्तुति देंगे। 16 जनवरी की शाम प्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा के नाम रहेगी। 17 जनवरी को इंदौर के श्रेयस शुक्ला एवं बैंड सुगम संगीत की प्रस्तुति देंगे। महोत्सव के अंतिम दिन 18 जनवरी को इंडोनेशिया और श्रीलंका के कलाकार अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिव केंद्रित नृत्य-नाट्य प्रस्तुति देंगे जिसका निर्देशन कोकोरवा पुत्रा और अरियारन्ने कालूराच्ची करेंगे।
लोकनृत्यों और कला यात्राओं का उत्साह
महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे के बीच त्रिवेणी संग्रहालय में विभिन्न जनजातीय नृत्यों का आयोजन किया जाएगा। इसमें भारिया जनजातीय भड़म नृत्य, गौंड जनजातीय ठाट्या, काठी नृत्य और भील जनजातीय भगोरिया नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे।
निकलेगी कला यात्रा
14 जनवरी को बस स्टैंड से महाकाल लोक तक शिव बारात (माच शैली) निकाली जाएगी। 15 जनवरी को रामघाट से डमरू वादन दल और 17 जनवरी को बुधवारिया से महाकाल लोक तक मलखंभ दल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते चलेंगे।
शिव तत्व पर संगोष्ठी
15 जनवरी को सुबह 10.30 बजे एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय ‘शिव तत्व और महाकाल- पुराइतिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में’ रखा गया है, जिसमें विद्वान अपने विचार साझा करेंगे।
भीड़ समाप्त होते ही दर्शन व्यवस्था बदलकर ६ जनवरी पहले की तरह कर दी गई है। अब १४ जनवरी से होने वाले श्री महाकाल महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
-आशीष फलवाडिय़ा, सहायक प्रशासक, महाकाल मंदिर









