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टॉवर चौक पर दंगा, पब्लिक ने पत्थर फेंके पुलिस ने चलाए डंडे, आंसू गैस के गोले छोड़े

दंगाइयों से निपटने की तैयारी

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पहली बार बीच शहर में पुलिस का शक्ति प्रदर्शन, पब्लिक भी शामिल

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सुबह के वक्त आमतौर पर शांत रहने वाला टॉवर चौराहा शुक्रवार सुबह पुलिस और दंगाइयों से भरा था। दंगाई नारे लगाते हुए पत्थर फेंक रहे थे। रोकने के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें मोर्चा संभाले थी। आखिरी में पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी, घायलों को एम्बुलेंस में डाला गया और प्रदर्शन शांत हुआ।

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यह सब कुछ शुक्रवार सुबह करीब दो घंटे तक टॉवर पर हुआ। लेकिन अच्छी बात यह है कि यह सब नाटकीय था। पुलिस द्वारा मॉकड्रिल के तहत यह सब किया गया था। अभी तक मॉकड्रिल पुलिस लाइन में होती आई है। यह पहला मौका है जब पुलिस ने मॉकड्रिल बीच शहर मेें की और पब्लिक भी इसका हिस्सा बनी। पुलिस ने लोगों को आंदोलनकारी टीम का हिस्सा बनाकर उनके हाथ में कागज के पत्थर थमा दिए जिसे नारे लगाते हुए उन्हें पुलिस पर फेंकना थे। उत्साही लोगों ने इस मॉकड्रिल का आनंद लिया, वहीं आम लोगों ने यह देखा कि जिले की पुलिस दंगा-बलवा रोकने में कितनी सक्षम है। एडिशनल एसपी गुरुप्रसाद पाराशर, आरआई रणजीतसिंह के मार्गदर्शन में मॉकड्रिल हुई। सीएसपी श्वेता गुप्ता, दीपिका शिंदे, पुष्पा प्रजापति और राहुल देशमुख पुलिस की अलग-अलग टीम के लीडर थे। जबकि इनके थाना क्षेत्रों के टीआई टीम की कमान संभाले थे। मॉकड्रिल में शहर व लाइन का पुलिस बल शामिल था।

पुलिस टीम को ट्रेनिंग, जनता को संदेश
मॉकड्रिल पुलिस की तैयारी का प्रदर्शन और प्रैक्टिस है। जिसमें पुलिस टीम को बलवा रोकने के लिए हथियारों का उपयोग, आंसू गैस, लाठी चार्ज आदि की प्रैक्टिस कराई जाती है। उन्हें समझाया गया कि ऐसे प्रदर्शन में खुद को भी बचना है और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हथियार या लाठी का उपयोग कमर के नीचे के हिस्से में करना है, ताकि चोंटे कम खतरनाक हों। बीच शहर में मॉकड्रिल का जनता को पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैयार है।

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मरीज की मौत से आक्रोश, नारेबाजी के बाद चक्काजाम
अस्पताल में मरीज की मौत के बाद लोगों ने नारेबाजी, चक्काजाम और पथराव किया। बलवाइयों का नेतृत्व भी पुलिस अधिकारी ही कर रहे थे। इन बलवाइयों को आंसू गैस से रोकने की कोशिश की गई। पुलिस की अलग-अलग टीम जैसे केन टीम, लाठी टीम, रिजर्व टीम, बैपन टीम, घुड़सवाल दल आदि ने दंगाइयों को रोकने की कार्रवाई का अपनी तैयारी का प्रदर्शन किया। दंगाई घायल हुए तो मेडिकल राहत टीम ने उन्हें वहां से उठाकर एम्बुलेंस से अस्पताल भेजने की तैयारी का प्रदर्शन किया। मॉकड्रिल करीब दो घंटे तक चली। इस दौरान टै्रफिक टॉवर से डायवर्ट कर दिया गया था।

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