43 साल बाद उज्जैन नगरीय क्षेत्र की सीमा बढ़ाने की तैयारी पीएस ने मांगा प्रस्ताव, बदल सकता है नगरनिगम का आकार

आसपास की ग्राम पंचायतें हो सकती हैं शहरी सीमा में शामिल, सबकुछ राजनैतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 43 साल बाद उज्जैन नगरीय क्षेत्र की सीमा बढ़ाने की तैयारी नगरीय प्रशासन विकास ने शुरू कर दी है। पीएस संजय दुबे ने शहर सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव उज्जैन नगरनिगम से मांगा है। हालांकि प्रस्ताव भेजने की समयसीमा तय नहीं की है। शहर की सीमा अंतिम बार1983 में बढ़ाई गई थी।
अभी उज्जैन नगर का दायरा 54 वार्ड में सिमटा हुआ है। अभी शहर की सीमा उत्तर दिशा में आगररोड पर चक कमेड़, पीलिया खाल से कानीपुरा,एमआर-5 तक जाती है।पूर्व में शंकरपुरा , मक्सीरोड उद्योगपुरी, विक्रमनगर, देवासरोड पर सैफी पेट्रोल पंप, हामूखेड़ी, मालनवासा तक है। पश्चिम में गोयलाखुर्द, प्रशांतिधाम, शांति पैलेस के पास से होते हुए अथर्व तक जाती है। दक्षिण में उज्जैन शहर की सीमा चिंतामन रोड पर शंकुतला द्वार, मुरलीपुरा, कालभैरव, भैरवगढ़ होते हुए केडी गेट तक रहती है।
शहर का दायरा बढ़ाने की जरूरत क्यों ?
43 साल पहले तक उज्जैन शहरी सीमा के अंतिम छोर तक नगरीय विकास नहीं था। इनमें से कई इलाके ग्रामीण क्षेत्र में थे और यहां जाना मुश्किल काम था। पर पिछले 25 सालों में इंदौर रोड, देवासरोड, मक्सीरोड और आगररोड पर शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। इंदौर रोड पर तो अर्बन आबादी टोलनाके के पास तक चली गई है।
इसी तरह देवासरोड पर दताना-मताना तक कॉलोनियां बस गई हैं। ऐसी ही स्थिति आगररोड पर है, जहां सुरासा से लेकर आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज तक कॉलोनियां बन गई हैं। मक्सीरोड पर भी शंकरपुर तक आबादी बस गई है। कुछ ऐसी ही स्थिति पश्चिम दिशा में शिप्रा पार इंदौर-उन्हेल बायपास पर है। इस इलाके में 50 से ज्यादा कॉलोनियां तैयार हो गई हैं और करीब 50 हजार से ज्यादा लोग रहने भी लगे हैं। ऐसे में यहां तक शहरी सीमा बढ़ाई जा सकती है।
क्या होगा असर
अगर शहरी सीमा में बढ़ोतरी होती है तो उज्जैन नगरनिगम का दायरा भी बढ़ सकता है। अभी उज्जैन नगरनिगम 54 वार्डों में फैला है। अगर नए इलाके शामिल किए जाते हैं तो यह संख्या 70 तक हो सकती है।
हालांकि यह दिक्कत
शहरी सीमा में बढ़ोतरी में सबसे बड़ी परेशानी ग्राम पंचायतें हैं। उज्जैन के पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में कई ग्राम पंचायतें हैं। पंचायतों के दायरे में रहने वालों को भले ही कुछ असुविधा हो पर टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में यहां के रहवासी नगरनिगम क्षेत्र में शामिल होने को आसानी से तैयार नहीं होंगे। तब शहरी सीमा वृद्धि का प्रस्ताव कमजोर पड़ सकता है।
फिलहाल नगरनिगम ने शहरी क्षेत्र की सीमा वृद्धि पर काम शुरू कर दिया है।
क्या कहते हैं राजनीति के खिलाड़ी
प्रशासनिक दृष्टि से भी उज्जैन शहर की सीमा बढ़ाने की जरूरत है। महानगर की तरफ बढऩे के लिए सीमा वृद्धि उचित है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं बढ़ेंगी और नगरनिगम का दायरा भी। -कलावती यादव, नगरनिगम अध्यक्ष
उज्जैन शहर की सीमा बढऩी ही चाहिए। शहर के साथ गांव में भी विकास हो रहा है। कई गांव अब शहर से हो गए हैं। खासकर उज्जैन के नजदीक के। सीमा बढऩे से इनको भी शहर सी सुविधा मिलेगी। -संजय अग्रवाल, नगर अध्यक्ष भाजपा
उज्जैन नगर की सीमा का विस्तार होना चाहिए। इंदौर, देवास, मक्सी और आगर रोड पर कई कॉलोनियों बस गई हैं। यहां के रहवासियों को नगरीय क्षेत्र सी सुविधाए ं मिल सकती है।- जगदीश अग्रवाल, पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष, एवं पूर्व यूडीए अध्यक्ष
नगरीय क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्र शामिल करने का असर मूलभूत सुविधाओं पर पड़ता है। इंदौर, देवास और मक्सी रोड पर कई कॉलोनियां डेवलप हो चुकी हैं। यहां तक सीमा बढ़ानी चाहिए। -सोनू गेहलोत, पूर्व नगरनिगम अध्यक्ष
उज्जैन नगर की सीमा बढ़ाए लंबा अरसा हो गया है। सीमा वृद्धि करने का फायदा उज्जैन शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में रहने वालों को भी होगा। -रवि राय, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम









