राणो जी छतरी पर होगा तर्पण, प्रमुख घाटों पर पानी

गयाकोठा पर शेड-टेंट की जरूरत, सिद्धवट पर मवेशियों के कारण हो रही गंदगी
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उज्जैन। कल रविवार से पितृ पक्ष प्रारंभ हो रहे हैं। शिप्रा तट पर तर्पण के लिए दूर-दूर से लोग आएंगे। तर्पण मुख्य रूप से रामघाट, सिद्धवट घाट और गयाकोठा पर होते हैं। एक दिन पहले यहां पंडे-पुजारी अपने सहयोगियों के साथ व्यवस्था जुटाने में लगे थे। अक्षर विश्व ने यहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
रामघाट: तटों पर पानी, कीचड़
शिप्रा किनारे राम घाट पर पानी भरा है। अवंतिका तीर्थ पुरोहित पं. भेरू गुरू (नीरज) ने बताया कि रामघाट क्षेत्र में पानी उतरने में ही वक्त लगेगा। पानी उतरने के बाद तीन-चार दिन कीचड़ बना रहेगा। इस कारण तर्पण यहां नहीं हो सकता। पंडे-पुजारी अपनी-अपनी व्यवस्था में लगे हैं। अधिकतर लोग राणो जी की छतरी पर तर्पण कराएंगे।
गयाकोठा : बरसते पानी में पूजन

पूर्वजों को तर्पण और जलदान के लिए खाक चौराहे पर स्थित प्राचीन मंदिर गयाकोठा पर श्राद्ध के दिनों में रोज सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। सुबह एक किमी से भी लंबी लाइन लग जाती है। यहां पर शनिवार सुबह बरसते पानी में पूजन चल रही थी। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां शेड और टेंट की व्यवस्था प्रशासन को करना चाहिए। साथ ही सफाई के लिए स्थाई कर्मचारी इन 16 दिनों के लिए फुल टाइम तैनात करना चाहिए।
सिद्धवट : तीर्थ पुरोहितों ने की व्यवस्था

शनिवार को सिद्धवट पर कई लोग दर्शन-तर्पण के लिए पहुंचे थे। शिप्रा लबालब है। तीर्थ पुरोहितों ने अपनी सुविधाजनक व्यवस्था बना रखी है। पानी से बचाव के लिए बरसाती और सफाई के लिए अलग से आदमी लगा रखे हैं जो फुल टाइम व्यवस्था बना रहे हैं। यहां तर्पण के लिए कल से सर्वाधिक लोग पहुंचेगे। पुरोहितों का कहना है कि वे लोग मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाते हैं कि यहां पूजन के लिए आने वालों को तकलीफ ना हो।
सिद्धवट क्षेत्र में 100 से अधिक मवेशी, शौचालय का गंदा पानी सड़क पर: श्री क्षेत्र पंडा समिति अध्यक्ष पं. राजेश त्रिवेदी ने बताया सिद्धवट क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या आवारा मवेशियों की सामने आई है। क्षेत्र में करीब 100 से अधिक मवेशी घूम रहे हैं जो श्रद्धालुओं द्वारा कर्मकांड के बाद चारा डालने के कारण पशु पालकों ने यहां छोड़ दिए हैं। पिछले एक महीने में पशुओं के कारण तीन श्रद्धालु घायल हो चुके है। पिछले सप्ताह यहां करीब 70 साल की बुजुर्ग महिला को मवेशी ने बुरी तरह घायल कर दिया था। मवेशियों के कारण घाट पर गंदगी भी होती है। इसके अलावा ड्रेनेज चौक हैं। शौचालय का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। इसमें से होकर श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचते हैं।










