राइजिंग स्टार… जज्बा, जुनून और हौंसले से लिखी जीत की कहानी

जब मेहनत की हो तो पूरी कायनात जश्न मनाती है, यूं ही नहीं मंजर मिल जाते, मंजिल पाने के लिए रातों को नींदें गंवानी पड़ती हैं।

उज्जैन। किसी शायर की यह शायरी मलखंभ स्पर्धा में जीत का परचम फहराकर स्वर्ण पदक जीतने वाली सपना माली पर सटीक बैठती हैं। जीतने का जुनून और जज्बा हो तो कामयाबी कदम चूमती है, इसी वाक्य को अपना ध्यैय बनाकर सपना ने जनवरी में भोपाल में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी मलखंभ मैन-वुमैन स्पर्धा में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। हालांकि, सपना की शुरुआती कहानी कुछ और है। सपना ने 13 साल की उम्र से कोच संतोष सोलंकी से स्वीमिंग और योग की ट्रेनिंग लेना शुरू की।
चार साल तक उन्होंने इसकी ट्रेनिंग और राष्ट्रीय स्तर की स्वीमिंग स्पर्धा में भाग लिया। इसके बाद उसकी प्रतिभा को देखते हुए कोच ने स्वीमिंग और योग के साथ उसे मलखंभ में अपना नाम बनाने की सलाह दी। इसके बाद सपना ने 17 साल की उम्र से मलखंभ खेलना शुरू किया और चार साल की अथक मेहनत के बाद भोपाल में हुई स्पर्धा में पिरामिड कॉम्पिटिशन में गोल्ड और टीम चैंपियनशिप में ब्रांज मैडल अपने नाम किया। अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपना और देश का नाम रोशन करना है।
सवाल- सबसे यादगार मैच या प्रदर्शन कौन-सा रहा?
जवाब- इसी साल 5 से 8 जनवरी तक भोपाल की एलएनसीटी यूनिवर्सिटी में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी मलखंभ मैन-वुमैन स्पर्धा में पहला गोल्ड और ब्रांज मिला, वही सबसे यादगार मैच है।
सवाल- आप अपना रोल मॉडल किसे मानते हैं और क्यों?
जवाब- हमेशा से मैंने कोच संतोष सोलंकी को रोल मॉडल माना है। उन्होंने ही हमेशा मुझे आगे बढऩे की प्रेरणा दी और एक खिलाड़ी के तौर पर मुझे निखारा। आज जो कुछ भी हूं, उन्हीं की वजह से हूं।
सवाल- आपका डेली प्रैक्टिस रूटीन क्या है?
जवाब- रोज सुबह मेडिटेशन और योग के साथ दिन की शुरुआत होती है। यह यह मानसिक रूप से मुझे फिट रखता है। इसके बाद एक निजी स्कूल में बच्चों को स्वीमिंग सिखाती हूं। इसके बाद का समय पढ़ाई का होता है। भोपाल से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई कर रही हूं। रोज शाम 5 से रात 9 बजे तक मलखंभ का अभ्यास करती हूं। इसके बाद फिर पढ़ाई कर रात ११.३० बजे सो जाती हूं।
सवाल- एक खिलाड़ी को अपना डाइट प्लान कैसा रखना चाहिए?
जवाब- खिलाड़ी होने के नाते डाइट का सबसे ज्यादा महत्व है। इसमें फास्ट फूड की जगह नहीं है। डाइट हमेशा हेल्दी और बैलेंस होनी चाहिए। मैं अपनी डाइट की बात करूं तो भीगे हुए चने और मंूग, सोयाबीन की बड़ी, थोड़े ड्रायफ्रूट ब्रेकफास्ट में लेती हूं। लंच में दाल-चावल, सब्जी, चपाती और दही। शाम को प्रैक्टिस के बाद रोस्टेड चने और दूध और डीनर में घर का सादा खाना खाती हूं। हफ्ते में एक बार नॉनवेज भी डाइट का हिस्सा है।
सवाल- पढ़ाई और खेल के बीच में बैलेंस कैसे रखती हैं?
जवाब- पढ़ाई को हमेशा से पहले स्थान पर रखा है। मैंने अपना चार्ट बनाकर रखा है, इसी के मुताबिक पूरा दिन का प्लान सेट होता है। जीवन में समयबद्धता बेहद जरूरी है, प्लान के अकॉर्डिंग ही पढ़ाई और खेल के बीच का समय मैनेज करती हूं। अब इसकी आदत हो गई है।
सवाल- हार या खराब प्रदर्शन से आपने क्या सीखा?
जवाब- हार या जीत खेल का हिस्सा है। हमेशा हम जीत नहीं सकते, कभी खराब दिन भी आता है जब प्रदर्शन हमारे मुताबिक नहीं रहता लेकिन इससे निराश नहीं होती बल्कि पूरी ताकत के साथ फिर से अपने सपनों को पूरा करने में जुट जाती। मैं यही कहना चाहती हूं कि एक हार आपका भविष्य तय नहीं करते। अगर आप मेहनत रहेंगे तो कामयाब जरूर होंगे।
सवाल- कामयाबी में परिवार की भूमिका कितनी अहम?
जवाब- पिता हेमंत माली ऑटो चालक हैं, मां रुकमा हाउस वाइफ हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है और बड़े भाई प्रॉपर्टी के बिजनेस है और महाकाल मंदिर के समीप शॉप भी चलाते हैं। एक छोटा भाई बीबीए की पढ़ाई कर रहा है। सभी ने हमेशा मेरा साथ दिया और लड़की होने के बावजूद मुझे खेल के प्रोत्साहित किया। मेरी सफलता में परिवार का अहम रोल है।
सवाल- मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहने के लिए क्या टिप्स देना चाहेंगे?
जवाब- मोबाइल जरूरत की चीज जरूर है लेकिन जीवन का अहम हिस्सा नहीं। उसे इतना ही इस्तेमाल करें जितनी जरूरत है। ज्यादा इस्तेमाल आपको लक्ष्य से भटकाता है। सोशल मीडिया आज अच्छी चीजों के लिए कम और बुरी चीजों के लिए ज्यादा प्रचलित है इसलिए अपने लक्ष्य में इसे बाधा ना बनने दें। कुछ अचीव करने के लिए बहुत कुछ छोडऩा पड़ता है।









