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राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी गुरुदेव का समाधि मरण

जैन समाज के लिए एक और अपूरणीय क्षति

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज आचार्य भूतबलि सागर जी महाराज के बाद जैन समाज के एक और सूर्य बुन्देल खंड के प्रथम आचार्य परम पूज्य राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी गुरुदेव का असमय समाधि मरण होना केवल जैन समाज ही नही सम्पूर्ण मानव समाज के लिए घोर आघात व बड़ी क्षति है।

एक के बाद एक तीन महान आचार्य का समाधिस्थ होना जिन्होंने अपने तप त्याग तपस्या के बल से न केवल जैन धर्म का परचम सर्वत्र लहराया बल्कि युवा पीढ़ी व समाज को भी नई दिशा प्रदान की, निश्चित ही आचार्य भगवन का महाप्रयाण अत्यंत दुखद हो कर असहनीय है।

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आचार्य गुरु भगवंत पूज्य विशुद्ध सागर जी महाराज के दीक्षा गुरु होने के साथ ही अन्य 350 से ज्यादा दीक्षा प्रदाता विशाल संघ के जननायक बुन्देल खंड के प्रथम आचार्य परम पूज्य राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी गुरुदेव का समाधी मरण रात्रि में 4 जुलाई को प्रात: ३ के आसपास महाराष्ट्र के जालना शहर के नजदीक देवमूर्ति ग्राम, सिंदखेड़ राजा रोड हुई है। गुरुदेव के निधन से उज्जैन के जैन समाज में शोक व्याप्त है। जैन समाज के वरिष्ठ अनिल गंगवाल आदि ने कहा कि यह दुखद समाचार जैन समाज के लिए एक और अपूरणीय क्षति है।

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