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रफ्तार से चल रहा उज्जैन इंदौर सिक्सलेन का काम

सिंहस्थ 2028 की तैयारियां… अलग-अलग टुकड़ों में चल रहा सिक्सलेन का काम

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रामवासा से मेंडिया तक सड़क के दोनों ओर मिट्टी डाली समतल करने के लिए चल रहा रोलर

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। सिंहस्थ 2028 से पहले बनने वाले उज्जैन-इंदौर सिक्सलेन निर्माण रफ्तार से चल रहा है। आवाजाही में परेशानी ना हो इसलिए टुकड़ों में काम किया जा रहा है। इसके तहत ग्राम रामवासा से श्री महावीर तपोभूमि तक सड़क के दोनों ओर मिट्टी डाली जा चुकी है। कई जगह रोलर की मदद से इसे समतल किया जा चुका है तो कुछ जगह काम चल रहा है। काम की तेज रफ्तार को देखकर कहा जा सकता है कि आगामी दिनों में सिक्सलेन निर्माण का काम और दिखाई देने लगेगा।

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दरअसल, उज्जैन-इंदौर सिक्सलेन का भूमिपूजन 11 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। इस योजना के तहत फोरलेन को सिक्सलेन में बदला जा रहा है। 1692 करोड़ रुपए से बनने वाले इस सिक्सलेन का निर्माण महाकाल हाईवे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने शुरू किया है। इसके लिए सांवेर रोड पर बेस कैम्प भी बनाया गया है जहां से पूरे प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग की जा रही है। फोरलेन में अभी 8.5-8.5 मीटर की दो-दो लेन यानी कुल चौड़ाई 17 मीटर है। सिक्सलेन में सड़क का हिस्सा 12.5-12.5 मीटर चौड़ा यानी कुल 25 मीटर हो जाएगा।

टुकड़ों में चल रहा काम

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46.475 किमी का सिक्सलेन इंदौर के अरबिंदो से उज्जैन के हरिफाटक ब्रिज तक बनेगा जिसका निर्माण टुकड़ों में किया जा रहा है। ग्राम रामवासा से तपोभूमि तक सड़कों के दोनों ओर मिट्टी डालने के बाद कई जगह इसे समतल भी किया जा चुका है। कई जगह जेसीबी की मदद से खुदाई और पेड़ों को हटाने का काम किया जा रहा है। इसका निर्माण सिंहस्थ २०२८ के पहले पूरा कर लिया जाएगा।

जरूरत को देखते हुए बनाया जा रहा

सिक्सलेन को आगामी 25 सालों की जरूरत को देखते हुए बनाया जा रहा है। फिलहाल इंदौर-उज्जैन फोरलेन पर रोज २5 हजार से ज्यादा वाहनों का बोझ है। एक अनुमान के मुताबिक सिंहस्थ 2028 के दौरान ट्रैफिक लोड हर दिन करीब 60 हजार वाहनों का होगा। हालांकि, इसके बनने के बाद इंदौर रूट से उज्जैन आने वालों का सफर और आसान हो जाएगा।

सिक्सलेन में यह खास

दो ऐतिहासिक शहर इंदौर-उज्जैन को जोड़ने वाला ४६ किमी का विस्तार।

निर्बाध यात्रा के लिए ६ लेन, ३ फ्लाईओवर और ६ अंडरपास।

आर्थिक राजधानी इंदौर और आध्यात्मिक सिटी उज्जैन के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ावा।

व्यापार, पर्यटन और तीर्थयात्रा की सुविधा प्रदान करेगा जिससे क्षेत्रीय विकास होगा।

सुरक्षित और आनंददायक सफर के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा।

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