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नगरीय निकाय कमिश्नर ने रोकी उज्जैन में पदस्थ रहे दो पूर्व इंजीनियरों की पेंशन वृद्धि

कारनामों के कारण चर्चित रहे हैं दोनों निगम इंजीनियर

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने अनुशासनहीनता और अनियमितताओं के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए उज्जैन नगर निगम के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री जीके कठिल और तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एलडी दोराया की वार्षिक वेतनवृद्धि (पेंशनवृद्धि) को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।

आरोप है कि इन्होंने 2022 में उज्जैन नगर पालिक निगम में भवन निर्माण अनुज्ञा जारी की थी, जिसमें अनियमितताएं बरती गई। जांच के आधार पर दोनों इंजीनियरों के खिलाफ शिकायतेें सही पाई गई। जांच रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने के पश्चात दोनों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

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गंभीरता से ली जा रही है शिकायतें

आयुक्त भोंडवे ने स्पष्ट किया है कि विभाग को प्राप्त होने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शासन प्रशासन की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

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एक कॉलोनी को पूरी होने के पहले ही दे दिया था पूर्णता प्रमाण पत्र

अधीक्षण यंत्री कठिल ने जून 2023 में एक ऐसी कॉलोनी को भी पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया था जिसे पांच महीने पहले ही विकास अनुमति जारी की थी। कोई कॉलोनी पांच माह में कैसे विकसित हो सकती है इस पर भी तब कई सवाल उठे थ, जबकि नियम अनुसार कॉलोनी निर्माण में कॉलोनाइजर द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश से ले-आउट पास कराने के बाद कॉलोनी में पार्क, सडक़, लाइट, सीवरेज, पानी की लाइन आदि की प्लानिंग दी जाती है।

निगम के जोन कार्यालय जांच के बाद रिपोर्ट कॉलोनी सेल पहुंचाते है। जिसके आधार पर विकास अनुमति जारी होती है। पूरी विकास प्रक्रिया जांचने के बाद पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होता है। इस प्रक्रिया को पूरा करने मेें सामान्य तौर पर कम से कम 2 साल लगते हैं, और यह काम उन्होंने सिर्फ 5 माह में कर दिया था।

मामला 1: रिटायरमेंट के पहले 11 कॉलोनियों को कर गए थे बहाल

अधीक्षण यंत्री जीके कठिल 30 जून 2023 को रिटायर हुए और उन्होंने अपने रिटायरमेंट के आखिरी महीने (जून 2023 ) में 5 कॉलोनियों को पूर्णता प्रमाण पत्र और 6 कॉलोनियों को विकास अनुमति जारी कर दी थी। अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने स्वयं के खर्चे पर एवजी भी रखे थे जो इनका कंप्यूटर संबंधी काम नगर निगम के दफ्तर में बैठकर करते थे। एवजी भी ऐसा व्यक्ति था जो रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने पर निगम से सर्वेयर पद से बर्खास्त हुआ था।

मामला 2: आवेदन के दिन ही पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया कार्यपालन यंत्री ने

देवासरोड पर बन रही एक बहुमंजिला बिल्डिंग मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एलडी दौराया चर्चा में आए थे। बहुमंजिला बिल्डिंग निर्माण में अनियमितता की जांच लोकायुक्त कर रही थी। इसी बीच कार्यपालन यंत्री दोराया ने उन्हें बिल्डिंग निर्माण का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया। देवासरोड आश्रय होटल के सामने के प्लॉट नंबर 40 पर बनी कमर्शियल बिल्डिंग पर 17 मार्च २०२२ को आवेदन किया गया और इसी दिन पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया गया। जबकि तीन महीने बाद 17 जून २०२२ को दोराया ने ही निर्माण को अवैध बताकर नोटिस जारी कर दिया। जिस पर सवाल उठा था कि बिल्डिंग निर्माण की जांच के बिना पूर्णता प्रमाण पत्र जारी हुआ या फिर अवैध निर्माण का नोटिस गलत तरीके से दिया।

होटलों की पार्किंग में अवैध मैरिज गार्डन भी चलवाए

दोराया पर हरिफाटक रोड की होटलों के पार्किंग में नियमविरुद्ध मैरिज गार्डन को संरक्षण के आरोप भी लगे थे। स्थानीय रहवासियों ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायतें की। दिसंबर 2021 में कार्रवाई के लिए दोराया बार-बार टीम लेकर गार्डनों पर जाते और सिर्फ नोटिस देकर लौट आते। इसी दौरान दोराया और गार्डन मालिक के बीच फोन पर हुई बातचीत की रिकार्डिंग शिकायतकर्ता के हाथ लग गई और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। तत्कालीन निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तब उन्हें उज्जैन से चलता कर दिया था।

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