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कब है रंग पंचमी, जानें पूजा विधि और महत्व

रंगों का त्योहार होली हाल ही में 25 मार्च 2024 को मनाया गया था. इसके बाद कृष्ण भक्त और पूरी दुनिया रंग पंचमी का इंतजार कर रही है जो होली के 5 दिन बाद यानी कि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में की पंचमी को मनाया जाता है. कहते हैं रंग पंचमी के दिन भगवान श्री कृष्ण (Lord Krishna) और राधा रानी ने एक साथ होली खेली थी और इसी दिन सभी देवी-देवता पृथ्वी लोक पर आए थे. ऐसे में राधा कृष्ण के अलावा देवी देवताओं पर अबीर-गुलाल अर्पित किया जाए, तो वो प्रसन्न होकर अपनी कृपा हमेशा बनाए रखते हैं. तो चलिए आज जानते हैं रंग पंचमी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व.

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रंग पंचमी 2024 डेट

रंग पंचमी 30 मार्च 2024 को मनाई जाएगी. दिवाली की तर्ज पर होली भी 5 दिन तक खेली जाती है. होलिका दहन से इसकी शुरुआत होती है, अगले दिन रंग वाली होली, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर भाई दूज और पंचमी तिथि पर रंग पंचमी पर इसकी समाप्ति होती है.

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रंग पंचमी 2024 मुहूर्त

पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 29 मार्च 2024 को रात 08 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी और समाप्ति 30 मार्च 2024 को रात 09 बजकर 13 मिनट पर होगी.

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देवताओं के साथ होली खेलने का समय – सुबह 07.46 – सुबह 09.19 (30 मार्च 2024)

रंग पंचमी पूजा विधि 

रंग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इस तिथि पर व्रत भी रखा जाता है। ऐसे में आप व्रत का संकल्प भी धारण कर सकते हैं। इसके बाद पूजा स्थल पर एक चौकी बिछाकर भगवान राधा-कृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके पास तांबे का पानी से भरा कलश भी रखें।

इसके बाद राधा-कृष्ण को कुमकुम, चंदन, अक्षत, गुलाब के पुष्प, खीर, पंचामृत, गुड़ चना आदि का भोग लगाएं। इसके बाद राधा-कृष्ण को फूल माला पहनाएं और गुलाल अर्पित करें। पूजन के बाद आरती करें और घर-परिवार के प्रार्थना करें। अब कलश में रखें जल से घर में छिड़काव करें।

रंग पंचमी का महत्व

रंग पंचमी मुख्य रूप से पंच तत्व जैसे पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल एवं आकाश को सक्रिय करने के लिए मनाई जाती है. मान्यता है कि रंगपंचमी पर पवित्र मन से पूजा पाठ करने से देवी देवता स्वंय अपने भक्तों को आशीर्वाद देने धरती पर आते हैं.

इस दिन गुलाल, अबीर देवताओं को अर्पित करने पर कुंडली में मौजूद बड़े से बड़ा दोष खत्म किया जा सकता है. घर में श्री अर्थात धन समृद्धि की वृद्धि होती है. धार्मिक मान्यता है कि गुलाल जब हवा में उड़ता है और जो इसके संपर्क में आता है उसमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है.

तमोगुण और रजोगुण का नाश होता है और सतोगुण में वृद्धि होती है. वहीं दूसरी मान्यता अनुसार जब हिरणकश्यप का वध हुआ और प्रहलाद को राज्य मिला तब जनता में खुशी की लहर दौड़ गई. इसी उत्साह में पांच दिन तक होली उत्सव मनाया गया. तभी से ये परंपरा चली आ रही है. मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात में रंग पंचमी धूमधाम से मनाई जाती है.

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