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शिप्रा के उद्गम से संगम तक फैलाएंगे जागरुकता

राज्य के 6 जिलों से होकर गुजरेगी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शिप्रा को सद्नीरा बनाने के लिए त्रिशूल शिवगण वाहिनी जमीनी स्तर पर बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत शिप्रा के उद्गम से संगम स्थल तक के गांव-गांव में जाकर वाहिनी के सदस्य धर्माचार्यों के साथ मिलकर जागरूकता फैलाएंगे। यात्रा प्रदेश के छह जिलों से गुजरेगी और करीब 520 किमी का सफर तय करेगी।

यात्रा की तैयारियों को लेकर रविवार को सदावल रोड स्थित उपनिषद आश्रम में शहर के प्रबुद्धजनों की बैठक आयोजित की गई। इसमें महामंडलेश्वर शैलेषानंद गिरी, ज्ञानदास जी, भगवान बापू, अखिलेश महाराज, अवधेशपुरी, प्रपन्नाचार्य, प्रेम प्रेमानंद ,मां मनोरमा , राजेंद्र शर्मा, अरविंदसिंह चंदेल की मौजूदगी में गहन विचार-विमर्श किया गया।

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रामघाट से शुभारंभ यहीं होगा समापन

या त्रा का शुभारंभ 2 नवंबर को रामघाट से होगा। वाहनों के काफिले के साथ वाहिनी पदाधिकारी, संत-महंत, महामंडलेश्वर शिप्रा किनारे के गांवों से होते हुए उद्गम स्थल धार जिले के काकारीबर्डी पहुंचेंगे। विंध्य पर्वतमाला से निकलकर मां शिप्रा मंदसौर जिले के भीतर चंबल नदी में मिलती है। इस संगम स्थल का कुछ हिस्सा राजस्थान में आता है। यात्रा, उज्जैन, देवास, इंदौर, धार, रतलाम और मंदसौर जिले में करीब 520 किलोमीटर का सफर तय करेगी।

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क्या होगा यात्रा में
यात्रा में कुल सात पड़ाव होंगे, चार रात्रि और तीन दिन में होंगे। इन पड़ाव स्थल पर सनातन पंचायत लगाई जाएगी। यात्रा में शामिल संत-महंत, महामंडलेश्वर लोगों से शिप्रा को सद्नीरा बनाने रखने की अपील करेंगे। वह शिप्रा का महत्व और उसे बचाए जाने की आवश्यकता लोगों को समझाएंगे।

हर पड़ाव पर दीपदान
हर पड़ाव पर मां शिप्रा को दीपदान भी किया जाएगा। त्रिशूल शिवगण वाहिनी के संस्थापक पं. सुरेंद्र चतुर्वेदी और आदित्य नागर ने बताया कि यात्रा के कुल सात पड़ाव होंगे। हर पड़ाव पर सनातन पंचायत होंगी। इसमें हमारे संत लोगों को शिप्रा को प्रवाहमान रखने की समझाइश देंगे। इस दौरान दीपदान भी किया जाएगा।

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