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मूवी रिव्यू: सिस्टम

अश्विनी अय्यर तिवारी ने हरमन बावेजा, अरुण सुकुमार और तस्नीम लोखंडवाला के साथ मिलकर फ‍िल्म की कहानी लिखी है। स्‍क्रीनप्‍ले काफी हद तक कसा हुआ और समझने में आसान हैं। राइटर्स नेहा के किरदार को भावनात्मक और नैतिक दुविधाओं के साथ दिखाने में सफल हुए हैं। अच्‍छी बात यह भी है कि कहानी को बहुत ज्यादा उपदेश देने वाला नहीं बनाया गया है। बल्‍क‍ि यह एक ऐसी महिला का विचार है, जो न सिर्फ कानूनी लड़ाइयां लड़ती है, बल्कि पारिवारिक विरासत के बोझ को भी उठाती है। यह फ‍िल्म को एक भावनात्मक आधार देता है। प्रिविलेज यानी विशेषाधिकार प्राप्त परिवार में जन्म लेने के बावजूद अपनी खुद की पहचान बनाने के लिए नेहा का संघर्ष, फ‍िल्म के सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक है।

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हालांकि, स्‍क्रीनप्‍ले कभी-कभी अपनी ही महत्वाकांक्षाओं को कमजोर कर देती है। कई अदालती मामलों में उस तीव्रता और जटिलता की कमी है, जो नेहा की जीत को सचमुच उसकी अपनी मेहनत का फल साबित करने के लिए जरूरी है। खासकर एक ऐसी फ‍िल्म जो कानूनी टकराव पर इतनी आधारित है, वहां तर्क और जांच-पड़ताल कभी-कभी बहुत ज्यादा सरल लगती हैं। इस कारण ड्रामा अपने पूरे इमोशन तक नहीं पहुंचता। रोमांच भी फीका पड़ता है। शुक्र है कि फ‍िल्म का आख‍िरी हिस्‍सा इस कमजोरी को काफी हद तक दूर कर देता है। क्‍लइमेक्‍स एक मजबूत केस और कुछ बेहतरीन ढंग से पेश किए गए ट्व‍िस्‍ट्स के साथ आता है, जो आख‍िर में एक संतोषजनक अंत तक पहुंचता है।

एक्‍ट‍िंग के मोर्चे पर ‘स‍िस्‍टम’ में सोनाक्षी सिन्हा ने हाल के वर्षों में अपना सबसे संयमित और विश्वसनीय प्रदर्शन किया है। वह नेहा राजवंश के आंतरिक संघर्ष को प्रभावी ढंग से दिखाती हैं, जिसमें वह अपनी कमजोरी और दृढ़ संकल्प के बीच संतुलन बनाए रखती हैं। आशुतोष गोवारिकर के साथ उनके टकराव वाले सीन्‍स में भावनात्मक गहराई है, खासकर तब जब पेशेवर महत्वाकांक्षाएं व्यक्तिगत रिश्तों से टकराती हैं।

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ज्योतिका इस फ‍िल्म की भावनात्मक रीढ़ हैं। सारिका रावत के रूप में वह कहानी में गर्माहट, गरिमा और शांत शक्ति लाती हैं, जिससे उनका किरदार तुरंत दर्शकों से जुड़ जाता है। आशुतोष गोवारिकर ने सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद एक मजबूत छाप छोड़ी है।

कुल मिलाकर, ‘सिस्टम’ भले ही एक खामियों से परे कोर्टरूम ड्रामा न हो, लेकिन यह ईमानदारी और दमदार अभिनय के साथ एक सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानी पेश करती है। यह दिखाते हुए कि कैसे सच अक्सर विशेषाधिकार और रसूख के प्रभाव से आकार लेता है। यह फ‍िल्म दर्शकों को कानून और न्याय के बीच के नाजुक संतुलन पर सोचने के लिए प्रेरित करती है।

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क्‍यों देखें- सोनाक्षी सिन्हा और ज्योतिका की जबरदस्त जोड़ी के लिए। एक दिलचस्प कोटरूम ड्रामा जो कानूनी व्यवस्था की सच्‍चाई पर जरूरी सवाल उठाती है। साथ ही मनोरंजन भी करती है। आप ‘सिस्‍टम’ OTT प्‍लेटफॉर्म Amazon Prime Video पर देख सकते हैं।

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