नसबंदी शिविर में महिला की गलत नस काटी, हालत गंभीर

यूनिट खून चढऩे के बाद भी हालत नाजुक, निजी अस्पताल में भर्ती किया
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। झारड़ा में हुए नसबंदी शिविर में डॉक्टर की लापरवाही से महिला की जान पर बन आई है। आरोप है कि गलत नस कटने से रक्तस्त्राव बंद नहीं हो रहा है। तीन दिनों में 20 यूनिट रक्त चढ़ाने के बाद भी महिला की हालत में सुधार नहीं हो रहा है। चरक में इलाज के बाद अब महिला को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।झारड़ा स्वास्थ्य केंद्र में 9 जनवरी शुक्रवार को नसबंदी शिविर लगा था। जिसमें 30 महिलाओं की नसबंदी की गई थी।
सातवें नंबर पर पिपल्या झारड़ा की रुकमा बाई पति जितेंद्र गायरी (29) का नसबंदी ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन जिला चिकित्सालय के सर्जन डॉ. राजेंद्र उपलावदिया ने किया था। परिजनों ने बताया ऑपरेशन के दौरान ही रुकवा बाई की हालत बिगडऩे लगी। उन्हें 2 बजे ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया था। शाम 7 बजे उनका इलाज होता रहा लेकिन ब्लडिंग बंद नहीं हो रही थी। जिस पर डॉ. तुरंत चरक अस्पताल रैफर कर दिया।
चरक में भी नहीं हो पाया इलाज
रु कमा के पति जितेंद्र ने बताया कि शुक्रवार रात को वे चरक अस्पताल आए लेकिन रुकमा को यहां भी इलाज नहीं मिला। चरक के डॉक्टरों ने हाथ ऊंचे कर दिया और अचेत रुकमाबाई को मृत बताकर घर ले जाने की सलाह दे दी। जितेंद्र ने बताया कि इसी बीच वे पाटीदार अस्पताल के संपर्क में आए और रुकमा को लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने रुकमा का ऑपरेशन किया और इस दौरान करीब २०यूनिट ब्लक भी दिया गया। इसके बाद से रुकमा की हालत स्थिर बनी हुई है और वो अभी आईसीयू में भर्ती है।
परिजनों का ढाई लाख खर्च सीएमएचओ कह रहे सरकारी खर्च पर भेजा
रुकमा बाई के पति जितेेंद्र ने बताया कि पाटीदार अस्पताल में इलाज के दौरान उनका करीब ढाई लाख रुपए खर्च हो चुका है। पेशे से श्रमिक जितेंद्र ने इस रुपए की व्यवस्था जेवरात बेचकर और उधारी से की है। दूृसरी ओर सीएमएचओ डॉ. अशोककुमार पटेल ने बताया कि महिला को कुछ समस्या थी, इस कारण ऑपरेशन में तकलीफ आई थी। उनका ऑपरेशन करना था। लेकिन जिला अस्पताल के ओटी में कुछ परेशानी के कारण उन्हें सरकारी खर्च पर पाटीदार अस्पताल भेजा गया। वहां उनका ऑपरेशन कर दिया गया है। अब महिला की हालत स्थिर है और खतरे के बाहर है। इस बारे में जितेंद्र ने कहा कि उसे सरकारी अस्पताल में न तो इलाज मिला और न ही कोई और मदद।
इनका कहना
रुकमा बाई के ऑपरेशन के दौरान कुछ मेजर समस्या आ गई थी। इस कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए चरक अस्पताल भेजा था। इसके बाद की जानकारी मुझे नहीं है। उन्हेें क्या तकलीफ हुई थी, यह भी मैं नहीं बता सकता
डॉ. राजेंद्र उपलावदिया, सर्जन









