इस बार चैत्र नवरात्रि 9 दिनों की, शुरुआत 19 मार्च से

भक्ति की खुशबू से महकेंगे मां के दरबार, नौ दिनों तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मां शक्ति की भक्ति के पर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होगी। खास बात यह है कि इस बार नवरात्रि पूरे 9 दिनों की होगी। नवरात्रि के दिन मां शक्ति के उपासना के लिए बेहद खास होते हैं इसलिए इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाएगी। दरअसल, सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है।
सालभर में दो गुप्त नवरात्रि सहित चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि सहित 4 नवरात्रि मनाई जाती है। माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि आती है। इसमें मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है, जबकि चैत्र माह की नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि एवं आश्विन माह में आने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के 9अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। अंतिम दिन कन्याओं को भोजन कराकर मां का आशीर्वाद लिया जाता है।
गुड़ीपड़वा की शुरुआत भी
19 मार्च से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होगी। अलसुबह सूर्य को अघ्र्य देकर शंख ध्वनि के बीच नए साल का स्वागत किया जाएगा। साथ ही महाराष्ट्रीय समाज का प्रमुख पर्व गुड़ीपड़वा भी मनाया जाएगा। इस दिन महाराष्ट्रीयन परिवारों में सुबह गुड़ी सजाकर उसकी पूजा की जाएगी और पूरनपोली, श्रीखंड-पूरी सहित अन्य व्यंजनों बनाए जाएंगे।
देवगुरु बृहस्पति होंगे इस वर्ष के राजा
ज्योतिषाचार्य ने बताया धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन बह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी इसलिए इसे हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाता है। हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। इस दिन गुरुवार होने से इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे। ज्योतिष के नियम के अनुसार जिस वार से साल शुरू होता है, उसी वार का स्वामी ग्रह पूरे वर्ष का राजा माना जाता है। ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, नीति और न्याय का ग्रह माना गया है।
वहीं इस साल के मंत्री मंगल ग्रह होंगे इसलिए इस संवत् का नाम ‘रौद्र’ रखा गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रौद्र नाम का यह संवत् थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। दुनियाभर में युद्ध, अस्थिरता, राजनीतिक तनाव बढऩे के संकेत हैं और देशों के बीच मतभेद भी देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा इस साल आगजनी, दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं बढ़ सकती हैं। बारिश कम होने से फसलों पर असर पड़ सकता है जिससे महंगाई बढऩे की संभावना है। कुल मिलाकर यह साल कुछ उतार-चढ़ाव और चुनौतियां लेकर आ सकता है।
इधर, खरमास 14 से, शुभ कामों पर लगेगा ब्रेक
इधर, 14 मार्च से खरमास की शुरुआत होगी जिसके चलते शुभ कार्यों पर एक माह का ब्रेक लग जाएगा। 14 अप्रैल को इसके समापन के साथ एक बार फिर से मंगल कार्यों की शुरुआत होगी और बैंड-बाजे के साथ शहनाइयां गूंजेंगी। दरअसल, सनातन धर्म में खरमास को अशुभ माना जाता है। इस दौरान विवाह समारोह, सगाई, कोई नया काम शुरू करना, नए मकान में गृह प्रवेश सहित अन्य शुभ कार्य करना वर्जित रहता है। इसके अलावा नया वाहन या कोई नई प्रॉपर्टी खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता है।
साल में दो बार आता है खरमास
खरमास साल में दो बार आता है। एक जब सूर्य धनु राशि में होता है। दूसरा जब सूर्य मीन राशि में आता है। इस दौरान सूर्य का पूरा प्रभाव यानी तेज पृथ्वी के उत्तरी गोलाद्र्ध पर नहीं पड़ता। सूर्य की इस कमजोर स्थिति के कारण ही पृथ्वी पर इस दौरान मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। किसी भी नए काम की शुरुआत नहीं की जाती।









