टाटा के खराब काम से मिलेगी अब निजात, 4 कंपनियों को सौंपा काम

एमआईसी : सड़क चौड़ीकरण प्रभावितों को मुआवजा देने सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। करीब नौ साल से शहर में चल रहे टाटा के सीवरेज प्रोजेक्ट के अब तेजी से पूरा होने की उम्मीद बंध गई है। एमआईसी ने पूरे शहर के बचे काम को 12 सेक्टर में बांटकर चार कंपनियों को काम देने के टेंडर जारी कर दिए हैं। यह कंपनियां तय समय पर प्रोजेक्ट को पूरा करेंगी। नगरनिगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा की इस पहल से टाटा की लापरवाही से धूल, गड्ढे और सड़क खराब होने की परेशानी झेल रहे शहरवासियों को निजात मिलेगी।
एमआईसी ने कोठी रोड स्थित स्वीमिंग पूल का संचालन भी निजी फर्म एवं कंपनियों को देने का प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया है। शनिवार को मेयर इन काउंसिल की बैठक महापौर मुकेश टटवाल की अध्यक्षता, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, एमआईसी सदस्य शिवेन्द्र तिवारी, सत्यनारायण चौहान, रजत मेहता, प्रकाश शर्मा आदि की उपस्थिति में आयोजित की गई।
बैठक में यूं तो कई प्रस्ताव थे लेकिन सबसे महत्वपूर्ण तीन प्रस्ताव अंत में लाए गए। इनमें टाटा का बचा काम चार कंपनियों को देने, शहर की जलप्रदाय व्यवस्था को बेहतर करने के लिए टंकी एवं पाइप लाइन का गोपी तीर्थ कंपनी का काम दूसरी कंपनी को देने और सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी सीवेज एवं पानी पाइप लाइन डालने के थे।
टाटा का बचा काम 12 भागों में बांटा
टाटा कंपनी का बचार काम चार कंपनियां करेंगी। इसके लिए बचे काम को १२ भागों में बांटा गया है। एक कंपनी तीन भाग से ज्यादा नहीं ले सकेगी।
क्या होगा असर- काम तेजी से और तय समय पर होगा।
टंकी एवं पानी सप्लाई सिस्टम तैयार करना
पहले गोपी तीर्थ कंपनी को टंकी एवं पानी सप्लाई सिस्टम तैयार करने का काम सौंपा गया था। दीगर कारणों से कंपनी का ठेका रोका गया था। अब री टेंडर हुआ है। सूरत की फर्म यह काम पूरा करेगी।
फायदा- शहर में बेहतर पानी सप्लाई सिस्टम तैयार होगा।
सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी पाइप एवं सीवरेज लाइन
सिंहस्थ क्षेत्र में नगरनिगम स्थायी पाइप एवं सीवरेज लाइन डालेगा। पहले यह काम लैंड पुलिंग के जरिये होना था। तब उज्जैन विकास प्राधिकरण यह काम करने वाला था। अब लैंड पुलिंग योजना निरस्त हो चुकी है, ऐसे में नगरनिगम को संभागायुक्त ने यह जिम्मेदारी दी है। फिलहाल इस प्रस्ताव को विस्तृत चर्चा के लिए रोक लिया गया है।
क्या होगा असर- सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी सीवरेज और पाइपलाइन डलेगी। हर 12 साल में होने वाला खर्च बचेगा। योजना को लेकर सबसे बड़ी आशंका किसानों को तैयार करने की होगी। क्या नगरनिगम प्रशासन यह कर पाएगा? क्योंकि किसान जमीन पर स्थायी निर्माण नहीं करने देंगे और विवाद होंगे। ऐसे में नगर निगम की छवि खराब होने की आशंका रहेगी।
एक स्वीमिंग पूल खेल विभाग को दूसरा निजी को
कोठी रोड स्थित स्वीमिंग पूल तीन साल के लिए निजी कंपनी को सौंपा जाएगा। वह रखरखाव करेगी और शुल्क वसूलेगी। इसी तरह नजरअली मिल स्थित स्वीमिंग पूल खेल एवं युवा कल्याण विभाग को दिया जाएगा।
क्या होगा असर- निजी फर्म शुल्क की दर तय करने में मनमानी कर सकती है। वह सुरक्षा व्यवस्था से समझौता कर सकती है। ऐसे में हादसे की आशंका बन सकती है। नजरअली मिल स्वीमिंग पूल खेल एवं युवा कल्याण विभाग को देने से निगम का मालिकाना हक खत्म हो सकता है।
सीवरेज प्रोजेक्ट समय पर पूरा करेंगे: निगमायुक्त
सीवरेज प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए बचे काम को 12 भागों में बांट कर 4 कंपनियों को टेंडर दिए हैं। एक कंपनी तीन से ज्यादा प्रोजेक्ट कर सकेगी। अभिलाष मिश्रा, निगमायुक्त
एमआईसी ने यह भी फैसले लिए
गौंड बस्ती मल्टी का अधिग्रहण होगा। यहां के लोगों को पंवासा स्थित ईडब्ल्यूएस आवासीय यूनिट में स्थानांतरित किया जाएगा।
गदापुलिया- जयसिंहपुरा- लालपुल मार्ग, गाड़ी अडड़ा-तेलीवाड़ा मार्ग , ढाबारोड-छोटी पुलिया मार्ग चौडीकरण प्रभावितों को योजना अनुसार मुआवजा दिया जाएगा।









