नया रिकॉर्ड : 41,538 वाहनों की बंपर बिक्री के साथ ग्वालियर को पछाड़ उज्जैन बना प्रदेश का नंबर-1 ऑटो मेला

3.5 करोड़ की मर्सिडीज भी बिकी, आरटीओ को 225 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलने का अनुमान
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उज्जैन। विक्रम वाहन मेले के बाद धार्मिक शहर उज्जैन अब कंज्यूमर इकोनॉमी का नया केंद्र बनकर उभरा है। 40 दिवसीय विक्रम व्यापार वाहन मेले का रविवार को ऐतिहासिक कीर्तिमान के साथ समापन हुआ। मेले ने न सिर्फ पिछले साल के वाहन बिक्री के आंकड़ों को ध्वस्त किया, बल्कि साढ़े तीन करोड़ रुपए से अधिक कीमत वाली लग्जरी मर्सिडीज बेंज की बिक्री ने यह साबित कर दिया कि मालवा क्षेत्र की क्रय शक्ति में जबरदस्त उछाल आया है। इस साल मेले का सबसे चौंकाने वाला ट्रेंड चार पहिया वाहनों का रहा। कुल 41,538 वाहनों की बिक्री में से अकेले 32,548 फोर-व्हीलर रहे, जो कुल बिक्री का लगभग 78 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि उज्जैन का उपभोक्ता अब टू-व्हीलर से अपग्रेड होकर प्रीमियम मोबिलिटी की ओर शिफ्ट हो रहा है।
टैक्स में 50 प्रतिशत छूट और ऑन-द-स्पॉट लोन ने बनाया माहौल
मेले की सफलता के पीछे आरटीओ टैक्स में मिलने वाली 50 फीसदी की बड़ी छूट मुख्य वजह रही। इसके साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेज ग्राउंड पर बने 223 स्टॉल्स में डिजिटल लोन अप्रूवल और ऑन-द-स्पॉट डिलीवरी जैसी सुविधाओं ने ग्राहकों को खूब आकर्षित किया। आलम यह रहा कि मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य राजस्थान के लोगों ने भी उज्जैन आकर गाडिय़ां खरीदीं।
सिर्फ धार्मिक नगरी नहीं, अब ऑटो इकोनॉमी का हब उज्जैन
वर्ष 2024 में जहां 23,705 वाहन बिके थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा 41,538 तक पहुंच गया है। आरटीओ को इस मेले से करीब 225 से 250 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने का अनुमान है। उज्जैन अब ग्वालियर व्यापार मेले के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा वाहन मेला बन चुका है।
युवाओं के सिर चढ़कर बोला थार और बुलेट का जादू
आरटीओ से मिले आंकड़ों के मुताबिक मेले में युवाओं के बीच महिंद्रा थार और बोलेरो की सबसे ज्यादा मांग रही। वहीं, जो लोग आधुनिक लुक और फीचर्स को प्राथमिकता देते हैं, उन्होंने किया सोनेट पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया। दोपहिया वाहनों के सेगमेंट में आज भी रॉयल एनफील्ड बुलेट पहली पसंद बनी रही।









