पेट्रोल में बढ़ेगी इथेनॉल की मात्रा, नए ईंधन को मिली मंजूरी

पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की दिशा में भारत ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अब तक देश E20 यानी 20 फीसदी इथेनॉल मिले पेट्रोल तक पहुंचा था लेकिन अब इससे आगे जाने की तैयारी हो चुकी है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी BIS ने 15 मई 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के जरिए E22, E25, E27 और E30 के लिए देश के आधिकारिक मानक तय कर दिए हैं। सीधे शब्दों में कहें तो अब ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल को सरकारी मुहर मिल गई है।
इस फैसले से क्या बदलेगा?
यह सिर्फ एक तकनीकी घोषणा नहीं है बल्कि इसके पीछे कई बड़े मकसद हैं। विदेश से कच्चा तेल खरीदने पर जो अरबों रुपये खर्च होते हैं उसे कम किया जा सकेगा। हवा में जहरीले धुएं की मात्रा घटेगी और देश के चीनी उद्योग व बायोफ्यूल सेक्टर को एक नई ऊर्जा मिलेगी। खासतौर पर E25 मानक पर जोर से उन इथेनॉल उत्पादकों को बड़ा फायदा होगा जिनकी क्षमता अभी पूरी तरह काम में नहीं आ रही थी।
उद्योग जगत का क्या कहना है?
ऑल इंडिया डिस्टलरी एसोसिएशन यानी AIDA ने इस फैसले का खुशी के साथ स्वागत किया है। संगठन के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने इसे सही वक्त पर लिया गया दूरदर्शी निर्णय बताया और कहा कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियां हैं असली भविष्य
E30 तक पहुंचना आखिरी मंजिल नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि असली लक्ष्य E85 और E100 है जहां पेट्रोल में 85 से 100 फीसदी तक इथेनॉल का इस्तेमाल होगा। इस सफर में फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियां सबसे अहम हथियार साबित होंगी क्योंकि इनके इंजन अलग-अलग मात्रा में इथेनॉल मिले ईंधन पर बिना किसी रुकावट के दौड़ सकते हैं।
आगे की राह साफ हो गई
BIS के इन नए मानकों से गाड़ी बनाने वाली कंपनियों और तेल विपणन कंपनियों को अपनी भावी योजनाएं बनाने में काफी आसानी होगी। यह संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत की सड़कों पर इथेनॉल से चलने वाली पर्यावरण अनुकूल गाड़ियों की तादाद तेजी से बढ़ेगी जो एक साथ प्रकृति और देश की आत्मनिर्भरता दोनों के लिए फायदेमंद होगा।









