रागी ज्वार का पोहा-दलिया के साथ लखनऊ के मसाले और इंदौर की जैविक हल्दी ने जीता दिल

कालिदास अकादमी में लगे दो दिवसीय मिलेट्स फूड फेस्टिवल का समापन, अच्छा रिस्पांस मिला
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। कोठी रोड स्थित कालिदास संस्कृत अकादमी में लगे दो दिवसीय मिलेट्स फूड फेस्टिवल का रविवार को समापन हो गया। यहां दो दिनों तक सजी सेहतमंद जायकों की महफिल में मप्र पर्यटन विकास निगम के माध्यम से श्रीअन्न जैसे कोदो-कुटकी, रागी, बाजरा, जैसे मोटे अनाज से बनी खाद्य सामग्री परोसी गई जिसका शहरवासियों ने लुत्फ उठाया। इसमें लगे अलग-अलग स्टॉल्स से विशेष रूप से रागी ज्वार का दलिया, पोहा, लखनऊ के मसाले और इंदौर की जैविक हल्दी जैसे प्रोडक्ट््स ने लोगों का ध्यान खींचा।
सेहत के लिए फायदेमंद होने से इसकी डिमांड भी अच्छी रही। सुबह 11 से रात 10 बजे तक चले इस फूड फेस्टिवल में वैज्ञानिकों ने किसानों को उपज का वैल्यू एडिशन कर कीमत दोगुनी करने के तरीके बताए। इसके अलावा खेती के साथ फिशरी, पोल्ट्री, बकरी पालन की जानकारी देते हुए किसानों को मिलेट्स की खेती के लिए प्रेरित किया। श्रीअन्न की खेती से होने वाले लाभ की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि श्रीअन्न में खाद का प्रयोग नहीं के बराबर होता है, जबकि उत्पादन दो से तीन गुना होता है। इसके लिए ज्यादा पानी की जरूरत भी नहीं होती।
मिलेट एवं ग्लूटन फ्री फूड
मेले में एक स्टॉल ऐसा भी था जहां मिलेट के साथ ग्लूटन फ्री फूड आइटम भी थे। नैचर प्रो नामक इन प्रोडक्ट्स की फाउंडर किरन रतन मलिक ने बताया कि उनके स्टॉल पर डायबिटीज के मरीजों के लिए मल्टीग्रेन दलिया, बिना मैदे के केक के प्री-मिक्सेस, ग्लूटन फ्री आटा, पिज्जा बेस, ब्राउनी, रागी दलिया, रागी आटा, ज्वार सूजी और ग्लूटन फ्री फ्लोर भी बिक्री के लिए उपलब्ध था। ग्लूटन फ्री फ्लोर गेहूं से एलर्जी वालों के लिए अच्छा है। इसके 900 ग्राम पैक की कीमत 140 रुपए है, जबकि ज्वार दलिया 400 ग्राम पैक 130 रुपए और सूजी के 400 ग्राम पैक की कीमत 160 रुपए है। इसे ऑनलाइन अमेजॉन से भी खरीदा जा सकता है।
जैविक हल्दी से बने प्रोडक्ट
इंदौर से जैविक हल्दी प्रोडक्ट लेकर मेले में आए जितेंद्र पाटीदार ने बताया कि वह तीन तरह की हल्दी लेकर आए हैं। पहली आंबा हल्दी, दूसरी काली हल्दी, तीसरा हल्दी पावडर। इसके अलावा दूध में मिलाकर पीने के लिए मिल्क स्पेशल पावडर भी है जिसमेें अश्वगंधा, सौंठ, इलायची सहित अन्य जड़ी-बूटियां शामिल हैं। हम हल्दी के पत्तों को नारियल के तेल में मिक्स कर स्कीन केयर प्रोडक्ट भी बनाते हैं।
सिमरोल के रहने वाले जितेंद्र बताते हैं कि वह पिछले 8 साल से घर से ही बिजनेस कर रहे हैं। उनके प्रोडक्ट मप्र सहित महाराष्ट्र एवं गुजरात में भी बिकने जाते हैं। वॉट्सएप पर ऑर्डर देने पर ऑनलाइन प्रोडक्ट भेजा जाता है। हल्दी में सबसे महत्वपूर्ण कंटेंट करक्यूमिल होता है। इसे हम प्राकृतिक रूप से उगाते हैं जिसमें करक्यूमिल होता है। बाजार के मुकाबले शुद्धता भी ज्यादा होती है। हल्दी के साथ ढेंचा भी बोया जाता है। एक से हम उत्पादन लेते हैं तो ढेंचा खाद के रूप में इस्तेमाल होता है जो जमीन को पोषण देने का काम करता है।
लखनऊ के शुद्ध मसाले
लखनऊ से लवकुश शर्मा फूड फेस्टिवल का हिस्सा बने। उन्होंने मसालों का स्टॉल लगाया। शर्मा ने बताया कि वह दो प्रकार के मसाले लेकर आए हैं एक वेज मसाला है और दूसरा ऑल नॉनवेज मसाला है। इसमें रागी पावडर, चने का आटा, नमक मिर्ची, बेसन, गर्म मसाला सहित 65 प्रकार की चीजों को मिलाकर बनाया जाता है। दो तरह के मसालों के एक किलो के पैकेट की कीमत 450 रुपए है। इसे कोरियर से मंगवाया जा सकता है। लवकुश बताते हैं कि वह 17 सालों से मसालों का काम कर रहे हैं। इसमें सभी देशी मसालों का इस्तेमाल होता है जो पूरी तरह से हाथों से तैयार होकर शुद्ध होते हैं, जबकि बाजार में मिलावटी मसाले मिलते हैं। मेले में आकर अच्छा तो लगा ही रिस्पांस भी अच्छा मिला।
यह उत्पाद भी किए गए पसंद
कविता ओझा ने रागी ज्वार के पोहे का स्टॉल लगाया जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। उन्होंने इसके फायदे भी बताए।
खंडवा के शिवा धुर्वे ने जड़ी-बूटियों का स्टॉल लगाया। इसमें अलग-अलग दुर्लभ जड़ी-बूटियों थीं जो कई तरह दर्द और बीमारियों में काम आती हैं।
इसके अलावा पापड़, तेल एवं अन्य खाद्य सामग्रियों सहित कृषि संबंधी उत्पादों के भी स्टॉल शामिल रहे। जहां किसानों ने जानकारी ली।









