वीकली हेल्थ टिप्स : होम्योपैथी : दुष्प्रभाव शून्य और हर रोग में कारगर…

एलर्जी, अस्थमा, माइग्रेन , तनाव, चिंता और अनिद्रा का करें खात्मा

भा रत मेंं इलाज की मुख्यत: चार पैथी (एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्यो और यूनानी) प्रचलन में हैं। इनमे होम्योपैथी ऐसी पद्धति है जो हर रोग में कारगर है और जिसमें दुष्प्रभाव शून्य है। होम्योपैथी का सिद्धांत सम: समं समायति पर आधारित है। इसकी स्थापना जर्मन चिकित्सक सैम्युल हेनीमैन ने की थी। भारत में भी यह चिकित्सा प्रणाली अत्यंत लोकप्रिय है।
सरकार भी दे रही बढ़ावा
आयुष के माध्यम से सरकारें भी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दे रही हैं। भारत में भी आयुष मंत्रालय होम्योपैथी को प्रोत्साहित कर रहा है। यह शरीर की प्रतिरक्षा(इम्यूनिटी)बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
कैसे काम करती है होम्योपैथी
होम्योपैथी पर अनेक शोध हुए हैं। इनके मुताबिक होम्योपैथी रोग के मूल कारण पर कार्य करती है। यह शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न रोगों में यह बहुत कारगर है। इसके दुष्प्रभाव नगण्य या बहुत कम होते हैं।
क्रानिक डिसीज में सहायक
यह पुरानी बीमारियों(क्रानिक डिसीजेस)के दीर्घकालिक उपचार में सहायक है। इसका उपचार किफायती भी है। दूरदराज के इलाकों में भी इसकी पहुंच आसान है। इंटीग्रेटेड मेडिसिन में इसका महत्व बढ़ रहा है।
खासियत – यह रोगी-केंद्रित उपचार पद्धति होने से लोकप्रिय है। इसमें व्यक्तिगत प्रकृति के अनुसार दवा दी जाती है। आधुनिक परीक्षण पद्धतियों के साथ इसका संयोजन संभव है। आधुनिक विज्ञान के सहयोग से इसकी विश्वसनीयता बढ़ चुकी है।
किन रोग में कारगर
होम्योपैथी का एलर्जी, अस्थमा, माइग्रेन जैसे रोग में उपयोग बढ़ा है। त्वचा रोगों में भी यह कारगर है। बच्चों और वृद्धों के लिए सुरक्षित चिकित्सा पद्धति हैै। इसका मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य, तनाव, चिंता और अनिद्रा में उपयोग साबित हो चुका है। डिजिटल युग में टेलीमेडिसिन के कारण इसका विस्तार हुआ है।
डॉ. सिमरन कौर बग्गा
वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक









