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जीवन के सभी रसों को पूर्ण करती है रास की कथा: व्यास

उज्जैन। जीवन में किताब पढऩे से केवल ज्ञान प्राप्त हो सकता है परंतु उसी ज्ञान में अगर भक्ति मिल जाए तो वह प्रेम के रूप में बदल जाती और बिना प्रेम का ज्ञान केवल कोरा ज्ञान कहा गया है। उद्धव जो केवल ज्ञानी था गोपियों के पास जाकर वही ज्ञान के साथ श्री कृष्ण का प्रेमी भी हो गया। श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन उक्त बात पं. सुनील कृष्ण व्यास ने कथा में उद्धव प्रसंग सुनाते हुए कही। नागर धर्मशाला में आयोजित कथा में रास की कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि जन्म-जन्म की भटकती हुई जीवात्मा ने परमात्मा रूपी श्रीकृष्ण को रास के माध्यम से पाया। जीवन के हर रस को पूर्ण कर देती है रास की कथा। कथा के यजमान सत्यनारायण राठौर, रघुनंदन राठौर ने सभी भक्तों से कथा का लाभ लेने की अपील की।

 

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