दो मामले ऐसे हो गए, जिनमें रक्षक ही बन गए भक्षक…..!

By AV NEWS

प्रायवेट स्कूलों में बगैर पुलिस वेरीफिकेशन के रखे जा रहे सिक्युरिटी गार्ड

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:शहर के प्रायवेट स्कूलों में स्कूल संचालकों द्वारा प्रायवेट एजेंसी के माध्यम से सिक्युरिटी गार्ड रखे जा रहे हैं। इन सिक्युरिटी गार्डो को संबंधित ठेकेदार वर्दी पहनाकर भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं। उनका पुलिस वेरीफिकेशन नहीं करवा रहे हैं,जबकि यह उनकी जिम्मेदारी है। शहर में दो मामले ऐसे हो गए हैं,जिनमें सिक्युरिटी गार्डो की भूमिका संदिग्ध रही।

शहर में प्रायवेट स्कूलों के संचालकों द्वारा प्रायवेट सिक्युरिटी एजेंसियों की सेवाएं ली जा रही है। ठेका पद्धति पर ली जानेवाली सेवा में स्कूल संचालक यह देख रहे हैं कि उन्हे कितने रूपए कम देना पड़ेंगे? वे यह नहीं देख रहे हैं कि जिस एजेंसी द्वारा सिक्युरिटी गार्ड भेजे जा रहे हैं,वह एजेंसी शासन के नियमों के तहत वैध है या नहीं? संबंधित एजेंसी द्वारा भेजे गए सुरक्षा गार्डो का पुलिस वेरीफिकेशन है या नहीं? यह भी संचालकों द्वारा नहीं देखा जा रहा है।

इस बात को लेकर अभिभावकों में स्कूल संचालकों के प्रति रोष व्यक्त किया जा रहा है। उनका आरोप है कि स्कूल संचालकों की अनदेखी के कारण सिक्युरिटी गार्ड बच्चों से बातें करते रहते हैं, उन्हे रोककर परिवार की जानकारी पूछते रहते हैं, बच्चों को अनुशासन में ढील देकर उनसे सामिप्य बढ़ा रहे हैं। इसकी ओर स्कूल संचालकों का ध्यान नहीं है। यही कारण है कि कुछ घटनाएं घट रही है और सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण परिवार चुप्पी साधकर बैठे हैं।

पहला मामला

एक स्कूल में एक सिक्युरिटी गार्ड जोकि युवा था,दो माह तक नौकरी करता रहा। किसी देहात क्षेत्र से आए उक्त युवक के बारे में ठेकेदार के पास भी बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। वह 6 हजार रुपए में 12 घंटे की नौकरी कर रहा था। उक्त ने स्कूली छात्रा से नजदीकी बढ़ाई और एक दिन दोनों लापता हो गए। जब अभिभावक की शिकायत पर स्कूल संचालक जागे ओर ठेकेदार को बुलाकर संबंधित युवक की जानकारी मांगी तो पता चला कि ठेकेदार के पास भी उसकी बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। पुलिस वेरीफिकेशन तो था ही नहीं। हालांकि चार दिन बाद छात्रा पुन: स्कूल आ गई।

दूसरा मामला

एक बाहरी युवक ने सिक्युरिटी गार्ड से दोस्ती की। उसी के साथ एक छात्रा से भी दोस्ती कर ली। जुलाई माह की बात है। अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में उक्त छात्रा ने संबंधिता सिक्युरिटी गार्ड के मोबाइल से अपने उक्त बाहरी मित्र के मोबाइल फोन पर फोन करवाया ओर बातचीत करके उसे स्कूल बुला लिया। जब अभिभावक छात्रा को लेने आए तो पता चला कि कोई युवक आकर उसे ले गया।

सिक्युरिटी गार्ड ने तथ्य छिपा लिए। जब अभिभावकों ने अपने बेटी के घर पर रखे मोबाइल को खंगाला तो एक नम्बर ट्रेस हुआ। फोन लगाया तो पता चला कि उसी के साथ बेटी गई है। इस पर युवक को उसके परिजनों की सहायता से पकड़ा और नीलगंगा थाने पर शिकायत की। युवक का मोबाइल जब्त होने पर पता चला कि जो कॉल आया था,वह सिक्युरिटी गाड्र का था। बाद में स्कूल संचालकों के दबाव में आकर मामला ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया।

इनका कहना है

एसपी सचिन शर्मा के अनुसार वे सिक्युरिटी एजेंसियों को सर्कुलर जारी करके पुलिस वेरीफिकेशन का कहेंगे।

डीईओ आनंद शर्मा के अनुसार वे सोमवार को ही प्रायवेट स्कूलों को पत्र जारी करके निर्देश देंगे कि शासन से मान्यता प्राप्त सिक्युरिटी एजेंसी से ही गार्ड रख्ेा। जिन्हे रखें उनका पहले पुलिस वेरीफिकशन करवाएं और पुख्ता कर लें कि व्यक्ति सही है। अभिभावकों के साथ गड़बड़ होने पर स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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