पहले के मुकाबले दूसरे सेशन में मैथ्स बना चुनौती

जेईई मेन्स सेशन 2- लंबे व कठिन सवालों ने विद्यार्थियों को किया परेशान

उज्जैन। देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन्स 2026 का दूसरा सेशन गुरुवार से शुरू हो गया है। यह ८ अप्रैल तक चलेगा। उज्जैन के एक परीक्षा केंद्रों पर पहले दिन की दोनों शिफ्ट की परीक्षाओं में सवालों का स्तर सामान्य से ज्यादा ही कठिन रहा। खासकर गणित के जटिल और लंबे सवालों ने टाइम मैनेजमेंट की बड़ी चुनौती पेश की। एक्सपर्ट्स का मानना है, जनवरी सेशन की तुलना में इस बार मुकाबला और कड़ा होने वाला है।
गणित- दोनों ही शिफ्ट में यह सेक्शन सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। परीक्षार्थियों के अनुसार, सवाल केवल कठिन ही नहीं, बल्कि बहुत लंबे भी थे। कैलकुलस, वेक्टर्स और 3-डी ज्योमेट्री से पूछे गए सवालों को हल करने में काफी वक्त लगा। जनवरी के मुकाबले इस बार मैथ्स का ग्राफ काफी ऊपर रहा।
केमिस्ट्री- इस सेक्शन ने छात्रों को सबसे ज्यादा राहत दी। पूरा पेपर मुख्य रूप से एनसीईआरटी पर आधारित रहा। ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री से सीधे सवाल पूछे गए। फिजिकल केमिस्ट्री में कुछ कैलकुलेशन जरूर थी, लेकिन वे ज्यादा कठिन नहीं रही।
फिजिक्स- फिजिक्स का पोर्शन संतुलित रहा। इसमें फॉर्मूला बेस्ड सवालों के साथ-साथ कॉन्सेप्चुअल प्रश्नों का अच्छा मिश्रण देखने को मिला। मैकेनिक्स और मॉडर्न फिजिक्स से अधिक सवाल पूछे गए।
जनवरी बनाम अप्रैल, क्या बदला?
विशेषज्ञों और छात्रों के अनुसार, अप्रैल सेशन के पहले दिन की परीक्षा जनवरी के मुकाबले थोड़ी अधिक कठिन रही। जनवरी में जहां मैथ्स औसत था, वहीं इस बार इसे कैलकुलेटिव रखा गया है। इसका सीधा असर ओवरऑल पसेंटाइल पर पड़ सकता है। इस बार कटऑफ और पसेंटाइल पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण होने के आसार हैं।
फिजिक्स-केमिस्ट्री पर करें फोकस
जेईई मेन्स की आने वाली शिफ्ट में भी लगभग ऐसा ही पैटर्न देखने को मिल सकता है। परीक्षार्थियों के लिए सलाह है कि वे परीक्षा के दौरान गणित के कठिन या लंबे सवालों में उलझकर अपना समय बर्बाद करने के बजाय केमिस्ट्री और फिजिक्स में अपनी पकड़ मजबूत करें। स्कोरिंग बढ़ाने के लिए केमिस्ट्री में विशेष रूप से एनसीईआरटी के रिविजन पर ही फोकस करना चाहिए।









