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भारतीय सभ्यता 5 हजार साल पुरानी, इसे विकृत रूप में प्रस्तुत किया : केवलिया

प्रज्ञा प्रवाह मालवा प्रांत के युवा संवाद में इतिहास पर मंथन

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 5 हजार साल पुरानी भारतीय सभ्यता जीवंत सांस्कृतिक धारा है, इसे व्यवस्थित रूप से समझकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। वामपंथी इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत किया है।

यह बात दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. शुभम केवलिया ने कही। वे प्रज्ञा प्रवाह के मालवा प्रांत के युवा संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कालिदास अकादमी में हुए आयोजन के वह मुख्य वक्ता थे। वह सरस्वती और हिंदू सभ्यता के मूल विषय पर अपनी बात रख रहे थे। सरस्वती नदी के ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक पक्ष को सामने रखते हुए डॉ. केवलिया ने कहा कि सरस्वती नदी वास्तविक थी।टेक्टोनिक शिफ्ट के कारण वह विलुप्त हो गई।

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सरस्वती और सिंधु नदी के तट वैदिक सभ्यता थी, जो विकसित थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता अक्षरविश्व के प्रधान संपादक सुनील जैन ने की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय इतिहास को प्रमाणों के आधार पर फिर से समझने की जरूरत है। युवा संवाद जैसे कार्यक्रम युवाओं को उनकी सांस्कृतिक पहचान से जोडऩे का काम कर रहे हैं। मालवा प्रांत प्रमुख आदेश शिंदे ने प्रज्ञा प्रवाह की उज्जैन एवं मालवा प्रांत की गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन युवा आयाम विभाग के कनिष्क द्विवेदी ने किया।आभार मालवा प्रांत संयोजक दीनदयाल बेदिया ने माना।

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